Giving Expression for its frequency Oscillations

Giving Expression for its frequency Oscillations

Giving Expression for its frequency Oscillations:-Input and output impedance, transistor as an oscillator, general discussion, and theory of Hartley oscillator only. Elements of transmission and reception, basic principles of amplitude modulation and demodulation. Principle and design of linear multimeters and their application, cathode ray oscilloscope, and its simple applications.

खण्ड-

 

प्रश्न 28. स्वच्छ परिपथ आरेख देते हुए, हार्टले दोलित्र की कार्य-प्रणाला समझाइए। इसके दोलनों की आवृत्ति के लिए व्यंजक दीजिए। 

Describe with a neat circuit diagram, the working of Hartley oscillator, giving expression for its frequency of oscillations. giving expression for its frequency of oscillations. 

 

अथवा

 

हार्टले दोलित्र की कार्यविधि का सचित्र वर्णन कीजिए। आवृत्ति तथा पुनःनिक अंश के सूत्र की उत्पत्ति कीजिए। 

Describe the working of the Hartley oscillator with a diagram. Derive the formula for frequency and feedback fraction. 

 

अथवा

 

हार्टले दोलित्र का स्वच्छ चित्र बनाइए तथा इसकी कार्यविधि समझाइए। 

Draw the circuit diagram of a Hartley Oscillator and explain its working. 

 

उत्तर : हार्टले दोलित्रयह एक सरलतम परन्तु सर्वाधिक विश्वसनीय दोलित्र है जिसका रेडियो में बहुत उपयोग होता है। चित्र-69 में ट्रांजिस्टर हार्टले दोलित्र का परिपथ प्रदर्शित किया गया है जिसमें ट्रांजिस्टर को उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास (common emitter ‘configuration) में प्रयुक्त किया गया है। इसमें केवल एक टैंक कुण्डली होती है जिसे केन्द्र पर टैप करके दो भागों L1 व L2 में विभाजित कर लेते हैं तथा इनके समान्तर एक परिवर्ती संधारित्र C1 लगा देते हैं। L1 L2 व C1, से मिलकर दोलनी टैंक परिपथ बनता है। L1 व L2 परस्पर प्रेरणिक रूप से युग्मित होते हैं तथा ऑटोट्रांसफॉर्मर (auto transformer) का निर्माण करते हैं।

 

L2 के एक सिरे को संधारित्र C2 के द्वारा ट्रांजिस्टर के आधार B से तथा दूसरे को पृथ्वी व संधारित्र CE के द्वारा ट्रांजिस्टर के उत्सर्जक E से सम्बद्ध कर देते हैं। इसी प्रकार, L1 के एक सिरे को संधारित्र C3 के द्वारा ट्रांजिस्टर के संग्राहक C से तथा दूसरे को पृथ्वी व संधारित्र CE के द्वारा उभयनिष्ठ उत्सर्जक E से सम्बद्ध कर देते हैं। इस  प्रकार , निर्गत C-E (संग्राहक-उत्सर्जक) परिपथ में तथा L2 निवेशी B-E (आधार-उत्सर्जक) परिपथ में सम्मिलित हो जाता है। निर्गत व निवेशी परिपथों के मध्य फीडबैक ऑटोट्रांसफॉर्मर की क्रिया से पूर्ण होता है। चूँकि ट्रांसफॉर्मर 180° का कलान्तर उत्पन्न करता है तथा उभयनिष्ठ उत्सर्जक ट्रांजिस्टर भी निर्गत व निवेशी के

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बीच 180° का कलान्तर उत्पन्न करता है, जिससे कुल कलान्तर 3600 बोरी फीडबैक धनात्मक है, जो दोलित्र के लिए आवश्यक है। फीडबैक-टैंक परिपथ-(L1-L2-C3) प्राप्त होता है तथा संधारित्र C2 के माध्यम से आधार B पर पुनःनिविष्ट होता है

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यहाँ L = L1 + L2 + 2M

ये दोलन, कुण्डली L2 पर एक अल्प विभव प्रेरित कर देती है। यह विभव टांजिन आधार-अमीटर सन्धि पर लगा दिया जाता है जो प्रवर्धित होकर संग्राहक परिपथ होता है। L1 तथा L2 के मध्य अन्योन्य प्रेरण के माध्यम से निर्गत ऊर्जा को निवेश में निविष्ट कर दिया जाता है। अत: टैंक परिपथ में ऊर्जा क्षय की पूर्ति करने हेतु, टैंक परिपथ निरन्तर ऊर्जा प्राप्त होती रहती है तथा इस प्रकार दोलन बने रहते हैं।

 

विश्लेषण-हार्टले दोलित्र a.c. तुल्य परिपथ चित्र-68 में दर्शाया गया है। टैंक परिपथ की प्रतिबाधा (प्रेरकत्व के प्रतिरोध को नगण्य मानने पर),

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उपर्युक्त समीकरण दोलनों के प्रतिबन्ध को प्रदर्शित करती है।


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