BSc Zoology Cell Biology And Genetics Short Question Answer

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BSc Zoology Cell Biology And Genetics Short Question Answer

 

BSc Zoology Cell Biology And Genetics Short Question Answer :- In this post all the questions of the second part of zoology are fully answered. This post will provide immense help to all the students of BSc zoology. All Topic of zoology is discussed in detail in this post.

 


 

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 – लयनकाय पर टिप्पणी लिखिए।

Write a note on Lysosome. 

उत्तर

लयनकाय

(Lysosome) – Notes

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा यकृत कोशिकाओं में गोलाकार सघन कायों (rounded dense bodies) को देखा गया था। सन् 1955 में । इनमें लयनकारी पाचक एन्जाइमों की उपस्थिति का पता चलने के पश्चात् सी०डी० दवे . . (C. de Duve) ने इन्हें लयनकाय नाम दिया।

कार्य के आधार पर लयनकाय चार प्रकार की होती हैं

(1) प्राथमिक लयनकाय (Primary lysosome) — इसे मण्ड कण (starch granule) भी कहते हैं। इसमें वह एन्जाइम उपस्थित होते हैं जिनका संश्लेषण अन्तःप्रद्रव्यी जालिका से संलग्न राइबोसोम्स में होता है।

(2) द्वितीयक लयनकाय (Secondary lysosome)-इसे हेदरोफैगोसोम (heterophagosome) अथवा पाचक रसधानी (digestive vacuole) भी कहते हैं। कोशिका द्वारा बाहरी पदार्थ के कोशिकाशन (phagocytosis) अथवा कोशिकापायन (pinocytosis) के फलस्वरूप इसका निर्माण होता है। पदार्थ का पाचन इसमें उपस्थित एन्जाइमों के द्वारा होता है तथा पाचन क्रिया के उत्पाद लयनकाय की झिल्ली से गुजरकर कोशिकाद्रव्य में समावेशित हो जाते हैं।

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(3) अवशिष्ट पिण्ड (Residual bodies)—यदि पाचन क्रिया सम्पूर्ण नहीं होती है, तब अवशिष्ट पिण्डों का निर्माण होता है।

(4) स्वत:भोजी रसधानी (Autophagic vacuole)-इसे साइटोलाइसोसोम या ऑटोफैगोसोम भी कहते हैं। इसके अन्दर पाचन के लिए स्वयं कोशिका का एक अंश उपस्थित होता है।

जब कोशिका की मृत्यु हो जाती है तब इसमें उपस्थित लयनकाय फट जाते हैं तथा अपने अन्दर उपस्थित एन्जाइमों को कोशिका में फैला देते हैं। ये एन्जाइम कोशिका का पाचन कर देते हैं अतः लयनकायों को ‘आत्महत्या के थैले’ (Suicidal bags) भी कहा जाता है।

प्रश्न 2 – न्यूक्लियोसोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Write short note on Nucleosome. 

उत्तर –

न्यूक्लियोसो 

(Nucleosome) Notes

गुणसूत्र के क्रोमैटिन तन्तु का वुडकोक (Woodcock, 1973) ने इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से विश्लेषण किया। उनके अनुसार प्रत्येक क्रोमैटिन पर मोतीनुमा (beaded) संरचनाएँ मिलती हैं, जो थोड़ी-थोड़ी दूरी पर स्थित होती हैं, जिन्हें न्यूक्लियोसोम (nucleosome या Nu Body) कहते हैं। यह हिस्टोन व DNA की बनी अर्द्ध बेलनाकार (quasicylindrical) रचना है। इसके मध्य का भाग हिस्टोन से बना होता है और कोर (core) कहलाता है। कोर में आठ प्रोटीन के अणु H2A, H2B, H3 तथा H4 के दो-दो अणु मिलते हैं। अत: इसे अष्टक (ऑक्टोमर-octomer) कहते हैं।  इस कोर के चारों ओर DNA की कुण्डली मिलती है। इसमें लगभग 166 पॉलिन्यूक्लियोटाइड मिलते हैं। दो न्यूक्लियोसोम को जोड़ने वाले DNA को लिंकर .

DNA (linker DNA) अथवा इण्टर Linker DNA ( न्यूक्लियोसोमल DNA (inter nucleosomal DNA) कहते हैं। इस प्रकार न्यूक्लियोसोम चार हिस्टोन प्रोटीन का अष्टक है, जो DNA के साथ जटिल संरचना बनाता है।

छह न्यूक्लियोसोम पुनः कुण्डलित होकर एक सोलेनॉइड (solenoid) बनाते हैं। बहत – से सोलेनॉइड कुण्डलित होकर क्रोमैटिन तन्तु बनाते हैं। सोलेनॉइड की संरचना . बताने के लिए क्लुग (Klug, 1982) को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 3 – केन्द्रक छिद्र सम्मिश्र का वर्णन कीजिए।

Describe the Nuclear pore complex.

उत्तर – 

केन्द्रक छिद्र सम्मिश्र 

(Nuclear Pore Complex) Notes

केन्द्रक छिद्र की संरचना जटिल है और इस छिद्र के आर-पार अणुओं के परिवहन में इसका विशेष महत्त्व है। इसी कारण इसको केन्द्रक छिद्र सम्मिश्र (nuclear pore complex) कहा गया है। इसमें एक 10 nm चौड़ी चैनल पायी जाती है, जिसके द्वार प्रोटीन अणुओं का अन्तर्ग्रहण होता है। इसी चैनल में न्यूक्लियोप्लाज्मिन नामक प्रोटीन पायी जाती है, जो अणुओं के अन्तर्ग्रहण के लिए संकेत देती है। प्रत्येक केन्द्रक छिद्र, जो दोहरी एकक केन्द्रक कला में स्थान-स्थान पर पाए जाते हैं, का व्यास 30 nm से 100 nm तक होता है। छिद्र की सीमा पर दोनों एकक कलाएँ परस्पर जुड़ जाती हैं। इन छिद्रों द्वारा केन्द्रक और कोशिकाद्रव्य के बीच सीधा सम्पर्क बना रहता है। प्रत्येक छिद्र के आर-पार एक मध्य पट (diaphragm) फैला रहता है, इसे वलयिका (annulus) कहते हैं। यह केवल जन्तु कोशिकाओं के केन्द्रक में ही पाया जाता है। ये छिद्र भिन्न दशाओं में बन्द हो सकते हैं और खुल सकते हैं।

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केन्द्रक आवरण के अन्दर की सतह पर अनेक लेमिन (lamin) पॉलिपेप्टाइड मिलकर एक ऐसी रचना बनाते हैं, जिसे केन्द्रक फलक (nuclear lamina) कहते हैं। यह गुणसूत्रों का केन्द्रक आवरण से सम्पर्क स्थापित करता है।

प्रश्न 4 – मैकुला एढेरेन्स तथा मैकुला ऑक्लूडेन्स क्या हैं?

What are Macula Adherens and Macula Occludens ?

उत्तर

मैकुला एढेरेन्स तथा मैकुला ऑक्लूडेन्स 

(Macula Adherens and Macula Occludens) Notes

मैकुला एढेरेन्स (Macula Adherens)-दो समीप की कोशिकाओं की प्लाज्मिक कला किसी भी स्थान पर मोटाई में बढ़ जाती है जिससे अनेक फिलामेन्ट्स निकलकर कोशिका के भीतर की ओर फैले होते हैं। इन फिलामेन्ट्स को टोनोफाइब्रिल्स कहते हैं और प्लाज्मा कला के मोटाई वाले भाग को मैकुला एढेरेन्स या डेस्मोसोम्स कहते हैं। अन्तराकोशिका डेस्मोसोम्स के बीच अन्तराकोशिका स्थान में एक प्रकार का पदार्थ होता है जिसके फलस्वरूप दोनों कोशिकाएँ एक-दूसरे से चिपकी रहती हैं।

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मैकुला ऑक्लूडेन्स (Macula Occludens)—यह एपिथीलियल कोशिकाओं तथा तन्त्रिका कोशिकाओं के बीच पाया जाता है। इसमें प्लाज्मिक कला मोटी हो जाती है और समीप का पदार्थ घना (dense) होता है, परन्तु इसमें फिलामेन्ट्स का अभाव होता है। इसकी विशेषता यह है कि समीप की प्लाज्मिक कला समेकित (fused) हो जाती है जिसके फलस्वरूप काफी दूर तक अन्तराकोशिका स्थान लुप्त हो जाता है और यह भाग बड़े अणुओं के विसरण के लिए कार्य नहीं कर पाता।

प्रश्न 5 – केन्द्रिक की परासंरचना का वर्णन कीजिए।

Describe the Ultrastructure of Nucleolus. 

उत्तर –

केन्द्रिंक की संरचना 

(Structure of Nucleolus) Notes

केन्द्रिक की परासंरचना (Ultrastructure of Nucleolus)-यह बड़ी, गोल व स्पष्ट रचना है। जिन कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण होता है, उनमें यह अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। विभिन्न कोशिकाओं में केन्द्रिकों की संख्या विभिन्न होती है। इनकी संख्या गणसूत्रों के sets के अनुसार होती है। केन्द्रिक दो स्पष्ट भागों में विभक्त रहता है –

(i) रवाहीन भाग (amorphous part),

(ii) तन्तुमय भाग (filamentous part. or nucleonema)। .

रवाहीन भाग कोशिका विभाजन के समय दिखाई देता है और फिर लुप्त हो जाता है। तन्तुमय भाग स्थायी रूप से रहता है। यह भाग DNA का बना होता है।

केन्द्रिक की परिधि के चारों ओर क्रोमैटिन कणिकाएँ उपस्थित होती हैं।

रासायनिक संरचना (Chemical structure)-इनकी संरचना RNA तथा प्रोटीन्स से होती है। प्रोटीन्स फाँस्फोप्रोटीन्स है।  RNA की संरचना राइबोसोमल RNA के समान होती है।

केन्द्रिक में acid phosphatase, nucleoside phosphorylase तथा DNA का संश्लेषण करने वाले एन्जाइम भी होते हैं।

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केन्द्रिक प्रोफेज अवस्था के अन्त तक लुप्त हो जाता है और टीलोफेज अवस्था के अन्त तक फिर प्रकट हो जाता है। यह कुछ विशेष गुणसूत्रों के विशिष्ट क्षेत्रों से निर्मित होता है। केन्द्रिक के निर्माण से सम्बद्ध गुणसूत्रों को न्यूक्लिओलर गुणसूत्र कहते हैं तथा वे क्षेत्र केन्द्रिक के पुन: संगठन में भाग लेते हैं और न्यूक्लिओलर संगठन कहलाते हैं। इनमें 18S तथा 28S राइबोसोमल RNA के जीन होते हैं।

केन्द्रिक का एक भाग सदैव स्थायी रहता है, इसे न्यूक्लिओलेमा कहते हैं। यह DNA के एक लूप के रूप में होता है और न्यूक्लिओलर गुणसूत्र के न्यूक्लिओलर संगठन क्षेत्र से विस्तारित रहता है।

प्रोफेज अवस्था में केन्द्रिक के लुप्त होने पर क्रोमैटिन लूप अपने संगत गुणसूत्र के न्यूक्लिओलर क्षेत्र में निवर्तित हो जाता है। टीलोफेज में केन्द्रिक के पुन: निर्मित होने पर DNA लूप अकुण्डलित हो जाता है तथा तन्तुक व कणिकीय पदार्थ इसको चारों ओर से आच्छादित कर लेते हैं।

कार्य (Functions) 

  1. केन्द्रिक राइबोसोम्स के synthesis से सम्बद्ध होता है। RNA केन्द्रिक से निकलकर कोशिकाद्रव्य में आ जाता है तथा राइबोसोम्स में रूपान्तरित हो जाता है।
  2. केन्द्रिक कोशिका विभाजन में भी महत्त्वपूर्ण भाग लेता है। केन्द्रिक के क्षतिग्रस्त होने पर कोशिका विभाजन नहीं होता।
  3. केन्द्रिक जेनेटिक सूचनाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी भेजने में बिचौलिए का कार्य करता है।

प्रश्न 6 – द्विसंकर क्रॉस पर टिप्पणी कीजिए।

Write short note on Dihybrid cross. 

उत्तर ऐसे संकर जिनमें दो जोड़ी जीनों अथवा युग्म विकल्पियों को सम्मिलित किया जाता है, द्विसंकर क्रॉस कहलाते हैं। उदाहरणार्थगोल तथा हरे बीजों वाले पौधे का झुरींदार तथा पीले बीजों वाले पौधे से कृत्रिम संकरण द्विसंकर संकरण कहलाता है।

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प्रश्न 7 – परीक्षार्थ संकरण के विषय में आप क्या जानते हैं?

What do you know about Test cross ? 

उत्तर परीक्षार्थ संकरण (Test cross)-प्रभावी जीनोटाइप वाले पौधों या प्राणियों के सम्बन्ध में जब हम यह जानना चाहते हैं कि वह समयुग्मजी (homozygous) है अथवा विषमयुग्मजी (heterozygous), तब इनका संकरण शुद्ध अप्रभावी जनक (recessive parent) से कराते हैं। इस प्रक्रिया को परीक्षार्थ संकरण (Test cross) कहते हैं। उदाहरणार्थजब समयुग्मजी बैंगनी पुष्प वाले पौधे (RR) को अप्रभावी जनक सफेद पुष्प (rr) वाले पौधे से क्रॉस कराते हैं तो सभी पौधे लाल पुष्प (Rr) वाले प्राप्त होते हैं, जबकि विषमयुग्मजी बैंगनी पुष्प वाले पौधे (Rr) को अप्रभावी जनक सफेद पुष्प वाले पौधे (rr) से क्रॉस कराते हैं तो 50% संकर बैंगनी पुष्प वाले पौधे (Rr) तथा 50% शुद्ध सफेद पुष्प वाले पौधे (rr) प्राप्त होते हैं। इस प्रकार पौधों (अन्य जीवधारियों) की जीन संरचना (जीनोटाइप) ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 8 – एकसंकर क्रॉस पर टिप्पणी लिखिए।

Write note on Monohybrid cross. 

उत्तर एकसंकर क्रॉस (Monohybrid cross)-अपने सामान्य प्रयोगों में मेण्डल ने एक लक्षण को ध्यान में रखकर तुलनात्मक लक्षणों वाले पौधों के मध्य संकरण कराया जैसे एक लम्बे तने (tall stem) वाले पौधे का संकरण एक छोटे तने (dwari stem) वाले पौधे के साथ अथवा एक गोल बीज वाले पौधे का संकरण एक झर्रीदार बीज वाले पौधे से कराया। इस प्रकार एक जोड़ी परस्पर विरोधी लक्षणों को ध्यान में रखकर किया गया संकरण एकसंकर संकरण (monohybrid cross) कहलाता है।

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प्रश्न 9 — हैमर्लिंग अथवा ग्रिफिथ के प्रयोग के विषय में लिखिए।

Write about the Experiment of Hammerling or Griffith. 

उत्तर

हैमर्लिंग अथवा ग्रिफिथ का प्रयोग 

(Hammerling’s or Griffith Experiment) Notes

जे० हैमर्लिंग ने सन 1934 ई० में प्रमाणित किया कि केन्द्रक ही कोशिका के लक्षणों को निर्धारित करता है जिससे अन्त में किसी प्राणी के लक्षण निर्धारित होते हैं। उसने ऐसीटेबुलेरिया (Acetabularia) नामक हरी शैवाल की दो जातियों पर कुछ प्रयोग किए। इस प्रयोग के लिए ऐ० क्रेनुलेटा (A. crenulata) तथा ऐ० मेडीटरेनिया (A. mediterranic) नामक जातियाँ छाँटी। इन दोनों की टोपियों (caps) के आकार में भिन्नता थी।

ऐ० क्रेनुलेटा की टोपी में ढीली रश्मियाँ होती हैं।

ऐ० मेडीटरेनिया की टोपी छाते की भाँति होती हैं।

इन दोनों में केन्द्रक वृन्त के निचले भाग में मूलाभास (rhizoids) में पाया जाता है।

प्रयोगयदि इनकी टोपी को काट दिया जाए तो प्रत्येक पर प्रारम्भिक प्रकार की टोपी का विकास हो जाएगा।

यदि इन टोपियों को हटाकर एक जाति के वृन्त का दूसरी जाति के वृन्तधारी मूलाभास पर रोपण कर दिया जाए तो विकसित हुई टोपी का आकार वृन्त के अनुसार निर्धारित न होकर केन्द्रक के अनुसार होगा। इस प्रयोग में यदि केन्द्रक ऐ० क्रेनुलेटा का होता है तो टोपी का आकार भी क्रेनुलेटा प्रकार का होगा। यदि केन्द्रक ऐ० मेडीटरेनिया का होता है तो टोपी का आकार मेडीटरेनिया प्रकार का होगा।

दोनों प्रकार के केन्द्रकों की उपस्थिति में टोपी मध्यवर्ती प्रकार की हो जाएगी। इस प्रयोग से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी जीव के लक्षण उसकी कोशिकाओं के केन्द्रक द्वारा नियन्त्रित होते हैं।

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प्रश्न 10 – यदि एक वर्णान्ध लड़की एक सामान्य लड़के से शादी करती है तब उनके बच्चों में वर्णान्धता की प्रतिशतता क्या होगी

If a colourblind female marries a normal male, then what will be the percentage of colourblindness in their offsprings? 

उत्तर वर्णान्ध लड़की (XX) तथा सामान्य लड़के (XY) से उत्पन्न सन्तानों में सभी लड़के (50%) वर्णान्ध तथा सभी लड़कियाँ (50%) वर्णान्धता की वाहक होंगी।

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प्रश्न 11 – डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० में अन्तर स्पष्ट कीजिए। 

Differentiate between DNA and RNA.

उत्तर  

DNA तथा RNA में अन्तर

(Differences between DNA and RNA) Notes

 

S.

No.

DNA RNA
1. यह दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड (poly- nucleotide) शृंखलाओं का बना होता है यह दो पॉलिराइबोटाइड शृंखला का बना होता है

 

2. पिरिमिडीन क्षार-थायमीन (Thyamine) पाया जाता है।

 

पिरिमिडीन क्षार-यूरेसिल (Uracil) होता है।

 

3. शर्करा डीऑक्सीराइबोस (Deoxy- Ribose) होती है।

 

शर्करा राइबोस (Ribose) होती है।
4. यह कोशिका की समस्त क्रियाओं का नियन्त्रण तथा नियमन करता है। यह

आनुवंशिक पदार्थ है।

 

प्रोटीन संश्लेषण के द्वारा लक्षणों के निर्धारण में सहायता करता है। यह प्राय: आनुवंशिक नहीं होता।

 

5. स्वयं रेप्लीकेट (replicate) होता है। DNA से अनुलेखन (transcription) के द्वारा बनता है।

 

6. मुख्यतः केन्द्रक के गुणसूत्र में पाया जाता है सूक्ष्म रूप में माइटोकॉन्ड्रिया तथा हरितलवक में उपस्थित होता है।

 

कोशिकाद्रव्य, केन्द्रिक, राइबोसोम में, उपस्थित होता है।

 

 

प्रश्न 12 – अपूर्ण प्रभाविता को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। 

Describe Incomplete dominance with the help of example.

अथवा अपूर्ण प्रभाविता में द्वितीय संतति पीढ़ी का जीनप्ररूपी लक्षणप्ररूपी अनुपात पर संक्षेप में व्याख्या कीजिए। 

Explain in brief about the phenotypic and genotypic ratio of f, generation in incomplete dominance. 

उत्तर अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete dominance)-असंख्य घटनाओं में यह देखा गया है कि जनक संकरण के पश्चात F1 पीढ़ी में सम्मिश्रित सन्तानों को उत्पन्न करते हैं अर्थात् कोई एक लक्षण प्रभावी नहीं होता बल्कि सन्ताने दोनों जनकों (प्रभावी तथा अप्रभावी) के संयुक्त लक्षण को प्रदर्शित करती हैं। यह घटना अपूर्ण प्रभाविता अथवा मध्यवर्ती वंशागति (Intermediate inheritance) कहलाती है। इसकी खोज सर्वप्रथम कार्ल कॉरेन्स (Carl Correns) ने की थी।

मिराबिलिस जलापा (Mirabilis jalapa) इस घटना का सर्वोत्तम उदाहरण है। इस पौधे को सामान्यत: 4 0’clock plant के नाम से जाना जाता है। इस पौधे की प्राय: दो समयुग्मजी किस्में-शुद्ध लाल पुष्प वाली तथा शुद्ध सफेद पुष्प वाली ज्ञात हैं। इन दोनों किस्मों में संकरण के पश्चात् F, पीढ़ी में लाल अथवा सफेद पुष्प वाले पौधे न बनकर गुलाबी रंग के पुष्प वाले पौधे प्राप्त होते हैं जिनमें स्वनिषेचन के पश्चात् F2 पीढ़ी में लाल गुलाबी तथा सफेद पुष्पों वाले पौधे क्रमश: 1 : 2 : 1 का अनुपात दर्शाते हैं।

प्रश्न 13 – जीन प्रारूप तथा लक्षण प्रारूप स्पष्ट कीजिए।

Describe Genotype and Phenotype. 

उत्तर जीन प्रारूप (Genotype)-किसी एक लक्षण का जीनिक प्रदर्शन जीन प्रारूप कहलाता है। जैसे लाल रंग के फूलों वाले पौधे का समयुग्मकी जीन प्रारूप (RR), जबकिं विषमयुग्मकी जीन प्रारूप (Rr) है। इसी प्रकार लम्बे तने वाले पौधे का समयुग्मकी जीन प्रारूप (TT) तथा विषमयुग्मकी जीन प्रारूप (Tt) है।

लक्षण प्रारूप (Phenotype)-किसी लक्षण का भौतिक या दृश्य रूप प्रदर्शन लक्षण प्रारूप कहलाता है। यह समयुग्मकी अथवा विषमयुग्मकी दोनों प्रकार का हो सकता है, जैसे-लम्बे तने का पौधा, बैंगनी पुष्प का पौधा, हरे बीजपत्र वाला पौधा इत्यादि।

प्रश्न 14 – यदि एक पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला में नाइट्रोजन क्षारों का क्रम A, A, C, G, T है तब इसकी पूरक श्रृंखला में क्षारों का क्रम क्या होगा

If the nitrogen base sequence in a polynucleotide chain is A, A, C, G, T what will be the sequence of the bases in its complementary chain?

उत्तर उपर्युक्त प्रश्न में पूछी गयी पूरक श्रृंखला में क्षारों का क्रम T, T, G, C, A होगा।’

प्रश्न 15 – रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

……….. को आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है। इन्होंने अपने प्रयोग ……… के पौधों पर किए। रुधिर वर्गों की खोज ……… ने की। ……… ………. ने 1953 में डी०एन०ए० की द्विकुण्डलीय संरचना को दर्शाया। 

Fill in the blanks : 

उत्तर – (1) ग्रेगर (2) मटर (Gard (3) कार्ल लैण्डस (4) वा

उत्तर

संकर विषमयुग्मजी संकर

(homozygous) Notes

……..…. is called father of genetics. He started his experiments with……….. plants. Blood groups discovered by …………………. and…..5….. showed in 1953 that DNA has a double helical structure. 

उत्तर – (1) ग्रेगर जॉन मेण्डल (Gregor John Mendel)

(2) मटर (Garden Pea)

(3) कार्ल लैण्डस्टीनर (Carl Landsteiner)

(4) वाटसन (Watson)

(5) क्रिक (Crick)।

प्रश्न 16 – संकर पूर्वज संकरण से आपका क्या तात्पर्य है?

What do you know about Back cross. 

उत्तर

संकर पूर्वज संकरण

(Back cross) – Notes

यह वह संकरण है जो विषमयुग्मजी संकर (heterozygous hybrid) सन्तानों तथा उनके समयुग्मजी (homozygous) प्रभावी अथवा अप्रभावी जनकों के मध्य कराया जाता है। उदाहरणार्थविषमयुग्मजी बैंगनी पुष्प वाले पौधे का संकरण प्रभावी समयुग्मजी बैंगनी पुष्प वाले जनक पौधे से कराने पर सभी पौधे बैंगनी (purple) पुष्प वाले उत्पन्न होते हैं, परन्तु F,1 पीढ़ी के विषमयुग्मजी लाल पुष्प वाले पौधे का संकरण अप्रभावी समयुग्मजी सफेद पुष्प वाले पौधे से कराने पर बैंगनी तथा सफेद पुष्प वाले पौधे 50:50 के अनुपात में प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 17  –  अर्द्धसूत्री तथा समसूत्री विभाजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between Meiosis and Mitosis.

उत्तर  

अर्द्धसूत्री तथा समसूत्री विभाजन में अन्तर 

(Differences between Meiosis and Mitosis) Notes

 

क्र० 

सं०

 

अर्द्धसूत्री विभाजन 

 

समसूत्री विभाजन 

 

1. अर्द्धसूत्री विभाजन में समजात गुणसूत्रों का युग्मन होता है।

 

इसमें युग्मन का अभाव होता है।

 

2. इसमें चार संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है जिनमें गुणसूत्रों की संख्या अपनी

जनक कोशिका से आधी होती है।

 

इसमें दो संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है जिनमें गुणसूत्रों की संख्या अपनी जनक कोशिका के समान होती है।
3. अर्द्धसूत्री विभाजन में प्रथम विभाजन न्यूनकारी होता है, जबकि द्वितीय विभाजन

समअर्द्धसूत्री (equatorial) होता है।

 

इसमें विभाजन समअर्द्धसत्री (equatorial) होता है।

 

4. इसमें सिनेप्टोनीमल सम्मिश्र (Synapto- nemal complex) पाया जाता है।

 

इसमें इस सम्मिश्र का अभाव होता है।

 

5. यह जनन कोशिकाओं में होता है। यह कायिक कोशिकाओं में होता है।

 

 

प्रश्न 18 – यूक्रोमैटिन तथा हेटरोक्रोमैटिन क्या हैं और दोनों में क्या अन्तर है?

What are Euchromatin and Heterochromatin and  differentiate between them ? 

उत्तर

यूक्रोमैटिन तथा हेटरोक्रोमैटिन 

(Euchromatin and Heterochromatin) Notes

केन्द्रक के अन्दर क्रोमैटिन का धागों जैसा जाल फैला रहता है। इस जाल को क्रोमैटिनजालिका (chromatin reticulum) कहते हैं। क्रोमैटिन के कुछ भाग विभाजनान्तराल अवस्था (interphase) के समय केन्द्रक में गहरा अभिरंजक (stain)| और कोशा विभाजन के समय हल्का अभिरंजक (stain) लेते हैं। इस भाग को heterochromation region या heterochromatin कहते हैं।

क्रोमैटिन का शेष भाग जो विभाजनान्तराल अवस्था (interphase) में हल्का अभिरंजक (stain) लेता है यूक्रोमैटिन (euchromatin) कहलाता है। इस भाग को आनुवंशिक रूप से गतिशील समझा जाता है क्योंकि इस भाग के द्वारा DNA से RNA का ट्रांसक्रिप्शन होता है।

यूक्रोमैटिन एवं हेटरोक्रोमैटिन 

(Differences between Euchromatin and Heterochromatin) Notes

 

क्रo

संo

यूक्रोमैटिन (Euchromatin) 

 

हेटरोक्रोमैटिन 

(Heterochromatin)

 

1. 30-804 धागों का बना होता है। 2604 धागों का बना होता है
2. गुणसूत्र के फैले भाग में स्थित होता है और इस भाग में गुणसूत्र खुले प्रतीत होते हैं।

 

गुणसूत्र के घने भाग में स्थित होता है और इस भाग में गुणसूत्र लिपटे

रहते हैं।

 

3. इण्टरफेज में हल्का रंग लेता है। इण्टरफेज में गहरा रंग लेता है।

 

4. इसमें DNA की मात्रा कम होती है। इसमें DNA की मात्रा अधिक होती है।
5. आनुवंशिक दृष्टि से सक्रिय होता है(इसमें ट्रांसक्रिप्शन की शक्ति होती है।)

 

आनुवंशिक दृष्टि से निष्क्रिय होता हैं। इसमें ट्रांसक्रिप्शन की शक्ति नहीं

होती

 

 

6. इस भाग में विनिमय (crossing अधिक होता है।

 

इस भाग में विनिमय (crossing | over) कम होता है।

 

 

प्रश्न 19 – गुणसूत्र की क्षीणता पर टिप्पणी कीजिए। omatin and 

Write short note on deletion of chromosome. 

उत्तर गुणसूत्र में किसी एक भाग की हानि हो जाने के कारण क्षीणता होती है। छोटी-छोटी क्षीणताओं को विषमयुग्मजी दशा में एक जीव द्वारा सहन किया जा सकता है। क्षीणताओं का वंशागति पर भी प्रभाव होता है। क्षीणताओं की उपस्थिति में एक अप्रभावी युग्मविकल्पी एक प्रभावी युग्मविकल्पी की भाँति व्यवहार करता है जिसको आभासी प्रभाव (pseudodominance) भी कहते हैं। मनुष्य में बिल्ली की भाँति म्याऊँ (cat-like cry) करने वाले बच्चों में इस लक्षण का होना एक गुणसूत्र क्षीणता का उदाहरण है।

प्रश्न 20 – रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(a) …….. को कोशा का ऊर्जा घर कहा जाता है।

(b) ……… को कोशा के आत्मघाती थैले कहते हैं। 

 (c) रुधिर वर्ग ……. को सार्वभौमिक दाता कहा जाता है। 

(d) …….. प्रोटीन संश्लेषण का स्थान है।

Fill in the blanks :

(a)……… is known as the power house of the cell.

(b) ……… is known as suicidal bags of the cell. 

(c) Blood group ….…… is known as universal donor.” 

(d) ……… is the site of protein synthesis. iromatin) 

उत्तर – (a) सूत्रकणिका (mitochondria)

(b) लाइसोसोम (lysosome) पेटिन

(c) ‘O’ ‘omatin)

(d) राइबोसोम (ribosome)। होता है।

प्रश्न 21 – सूत्री विभाजन की मध्यावस्था पर टिप्पणी कीजिए।

Write short note on metaphase of mitosis.

उत्तर

सूत्री विभाजन की मध्यावस्था 

(Metaphase of mitosis) Notes

पूर्वावस्था (prophase) में कोशिका विभाजन की तैयारी करती है। पूर्वावस्था का मुख्य लक्षण प्रत्येक गुणसूत्र में अनुदैर्घ्य विपाटन द्वारा दो सिस्टर क्रोमेटिड का निर्माण होता है। मध्यावस्था के प्रारम्भ में तर्क नलिकाएँ दिखाई देना प्रारम्भ हो जाती हैं। ये नलिकाएँ गुणसूत्र बिन्दु के द्वारा गुणसूत्र से जुड़ जाती हैं। गुणसूत्र में सक्रिय गति आरम्भ

हो जाती है जिसके द्वारा गुणसूत्र केन्द्र पर या मध्यवर्ती पट्ट पर विन्यसित हो जाते हैं। जन्तु कोशिका में तर्कु उपकरण, जिस पर गुणसूत्र विन्यसित होते हैं, का निर्माण तारककाय की सहायता से होता है। प्रत्येक तारककाय में दो तारक केन्द्र पाए जाते हैं जो तर्क निर्माण के समय विलगित होते हैं तथा केन्द्रक के विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं। दोनों ही तारक केन्द्र से ऐस्ट्रल किरणें बाहर की ओर फैलना प्रारम्भ कर देती हैं जो आपस में जुड़कर तर्कु तन्तु का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 22 – लिओन परिकल्पना क्या है

What is Lyon hypothesis ? 

उत्तर 

लिओन परिकल्पना 

 (Lyon hypothesis) Notes

मनुष्य में विश्रामावस्था में कोशिकाओं के केन्द्रक को देखकर लिंग को पहचाना जा सकता है। स्त्रियों की कोशिकाओं में इण्टरफेज केन्द्रक में एक ओर क्रोमैटिन की एक गहरी अभिरंजित संहति होती है। इसे लिंग क्रोमैटिन (sex chromatin) या बार बॉडी कहते हैं।

Mary Lyon के अनुसार भ्रूणोद्भव के प्रारम्भ में दो X-गुणसूत्रों में से एक आनुवंशिक रूप से अक्रिय एवं heteropyknotic होकर बार बॉडी बनाता है। इसे लिओन परिकल्पना कहते हैं। इस परिकल्पना के अनुसार स्त्री में एक बार बॉडी होती है| तथा पुरुष में बार बॉडी नहीं होती अथवा बार बॉडीज की संख्या X-गुणसूत्रों से सदैव एक कम होती है। केन्द्रक में –

(i) एक x गुणसूत्र होने पर बार बॉडी नहीं होती।

(ii) XX गुणसूत्र होने पर एक बार बॉडी होती है।

(iii) XXX गुणसूत्र होने पर दो बार बॉडी होती हैं।

(iv) XXXX गुणसूत्र होने पर तीन बार बॉडी होती हैं।

लिंग असंगति की दशा में असामान्य पुरुष (XXY) में एक बार बॉडी होती है। असामान्य स्त्री (X) में बार बॉडी नहीं होती।

प्रश्न 23 – घातक जीन पर संक्षिप्त में नोट लिखिए।

Write short note on Lethal gene.

उत्तर

जी 

(Lethal gene) Notes

कुछ जीन्स ऐसे होते हैं कि उनकी उपस्थिति से या तो जनन कोशिकाएँ ही नष्ट हो जाती हैं या फिर भ्रूण विकसित होने से पहले ही मर जाता है। ऐसे जीन्स को घातक जीन या घातक कारक कहते हैं। अधिकतर घातक जीन अप्रभावी होते हैं तथा केवल समयुग्मजी अवस्था में घातक जीन घातक प्रभाव उत्पन्न नहीं कर सकते हैं, परन्तु इनकी उपस्थिति में संरचनात्मक परिवर्तन उत्पन्न हो सकते हैं। घातक जीन की उपस्थिति से प्राणी पर जीवन के किसी भी समय पर घातक प्रभाव हो सकता है।

क्युनोट (Cuenot) ने चुहियों में घातक जीन का उदाहरण प्रस्तुत किया। पीले रंग की चुहियों के संकरण के फलस्वरूप पीले व सफेद रंग की चुहियाँ 2 : 1 के अनुपात में बनती हैं। काफी समय तक इस अपवाद का कारण ज्ञात न हो सका। Stiegleder (1971) ने बताया कि इस प्रकार के संकरण में 1/4th चुहियाँ भ्रूणावस्था में ही मर जाती हैं या अजन्मी चुहियाँ घातक जीन Y के लिए समयुग्मी होती हैं। पीला रंग Y जीन के कारण होता है जो घातक होते हैं, किन्तु यह घातक लक्षण अप्रभावी रहता है। y इसका अप्रभावी युग्मविकल्पी है। YY समयुग्मी अवस्था में घातक होते हैं। विषमयुग्मजी अवस्था Yy में पीला रंग तो विकसित होता है, किन्तु इसका घातक प्रभाव नहीं होता।

प्रश्न 24 –  व्यत्यास बिन्दु का सचित्र वर्णन कीजिए।

Explain Chiasma with the help of diagram.

अथवा जीन विनिमय पर टिप्पणी लिखिए। 

Write short note on Crossing over.

उत्तर  – 

व्यत्यास बिन्दु 

(Chiasma) Notes

अर्द्धसूत्री विभाजन में समजात गुणसूत्र एक-दूसरे के समीप समान्तर आ जाते हैं । और फिर एक-दूसरे के चारों तरफ लिपटकर घूम जाते हैं। वह बिन्दु जहाँ पर गुणसूत्र एक-दूसरे को ओवरलेप कर देते हैं, व्यत्यास बिन्दु (chiasma) कहलाता है।

समजात गुणसूत्र में व्यत्यास बिन्दु का बनना एक क्रॉस (cross) का होता है। प्रत्येक व्यत्यास बिन्दु के बनने के समय, चार में से दो अर्द्धगुणसूत्र, अन्दर वाले पहले टूट जाते हैं और फिर एक क्रम में जुड़ जाते हैं। इसमें प्रत्येक अर्द्धगुणसूत्र मूल गुणसूत्र का खण्ड लिए हुए होता है।

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व्यत्यास बिन्दु के बनने से मातृक व पैतृक युग्मों के जीन के बीच आदान-प्रदान होता है जिसके द्वारा नए संयोग का निर्माण होता है। इस क्रिया को जीन विनिमय अथवा क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। व्यत्यास बिन्दुओं की स्थिति व संख्या दोनों अनिश्चित होती हैं, जो कि गुणसूत्रों की लम्बाई पर निर्भर करती है। साधारणतः काइऐज्मेटा की संख्या 1 से 8 तक होती है।

प्रश्न 25 – कोशिका चक्र का वर्णन कीजिए। 

Describe the Cell cycle.

उत्तर  निरन्तर विभाजित होती हुई कोशिकाओं में से प्रत्येक कोशिका चार प्रावस्थाओं से होकर गुजरती है—GI, S, G, तथा MI

G1 एक विश्रान्ति प्रावस्था (resting stage) होती है। यह M प्रावस्था के समाप्त होने के पश्चात् आती है। इस प्रावस्था में शिशु कोशिका आकार में वृद्धि करती है। इसी अवस्था में DNA संश्लेषण में प्रयोग होने वाले अनेक एन्जाइम व आवश्यक पदार्थ उत्पन्न होते हैं अर्थात् G, अवस्था RNA तथा प्रोटीन संश्लेषण की प्रावस्था है।

S प्रावस्था में DNA का संश्लेषण होता है। DNA संश्लेषण के पश्चात् G2 फिर एक विश्रान्ति प्रावस्था होती है। Gi, S और G2 तीनों प्रावस्थाएँ मिलकर अन्तरावस्था बनाती हैं, जबकि मुख्य सूत्री विभाजन, प्रावस्था M के अन्तर्गत होता है। विभिन्न प्रावस्थाओं की अवधियाँ केवल विभिन्न जीवों में ही विभिन्न नहीं होती हैं, बल्कि एक ही जीव के विभिन्न ऊतकों में भी भिन्न-भिन्न होती हैं। सूत्री विभाजन प्रावस्था (M Phase)| में विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं; जैसे—पूर्वावस्था (prophase), मध्यावस्था (metaphase), पश्चावस्था (anaphase) तथा अन्त्यावस्था (telophase)।

DNA संश्लेषण सूत्री विभाजन को आरम्भ करने के लिए एक आवश्यक पद है। सूत्री विभाजन तब तक आरम्भ नहीं होता जब तक संश्लेषण पूरा नहीं हो जाता है। 3. S प्रावस्था की कोशिकाओं में DNA संश्लेषण को शुरू करने के लिए एक कारक पाया जाता है। मानव की कल्चर कोशिकाओं में यह प्रावस्था 6-8 घण्टे की होती है।

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G2प्रावस्था में केन्द्रक आयतन में वृद्धि होती है। इसकी अवधि लगभग 1-4 घण्टे की होती है। r-RNA तथा m-RNA का संश्लेषण इसी प्रावस्था में होता है। G2 प्रावस्था में एक कोशिका में DNA द्विगुणन होता है।

प्रश्न 26 – एम०आर०एन०ए० तथा टी०आर०एन०ए० में अन्तर लिखिए। 

Differentiate between mRNA and tRNA.

उत्तर –

एम०आर०एन०ए० तथा टी०आर०एन०ए० में अन्तर

(Differences between mRNA and tRNA)

क्रo

संo

mRNA tRNA
1. mRNA आनुवंशिक सूचना को, जो DNA में होती है, केन्द्रक से जीवद्रव्य में प्रोटीन संश्लेषण के लिए ले जाता है।

 

यह ऐमीनो अम्ल, राइबोसोम तथा

mRNA पर स्थित विशिष्ट कोडॉन को

पहचानने में सक्षम होता है।

2. यह कोशिका में पाए जाने वाले सम्पूर्ण यह सम्पूर्ण

RNA का लगभग 10% भाग बनाता है। अणु भार कम अणु भार अधिक होता है (5,00,000 से 20,00,000)।

 

यह सम्पुर्ण RNA का लगभग 10% से |15% भाग बनाता है। इनका अणु भार कम (25,000 डाल्टन) होता है।

 

3. mRNA का संश्लेषण केन्द्र में होता है।

DNA के दो strands में से एक पर

होता है।

 

ये ऐमीनो अम्लों को प्रोटीन संश्लेषण स्थल पर पहुँचाते हैं। इसलिए इन्हें adaptor

अणु भी कहा जाता है।

 

4. इसमें क्षारक की sequence DNA के

समान होती है, परन्तु थायमीन के स्थान पर

इसमें यूरेसिल होता है।

 

सभी प्रकार के tRNA में असामान्य न्यूक्लिओसाइड्स की एक बड़ी संख्या पायी जाती है
5. जीवद्रव्य में mRNA प्रोटीन संश्लेषण के

लिए template का कार्य करता है।

 

DNA की तरह इसमें भी द्विकुण्डलित खण्ड पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इन

द्विकुण्डलित खण्डों में A : U क्षारक युग्मक अधिक सामान्य होते हैं।

 

 

 

प्रश्न 27 – लैम्पब्रश एवं पॉलिटीन गुणसूत्रों में अन्तर बताइए। 

Write the difference between Lampbrush chromosome and Polytene chromosome. 

उत्तर  

लैम्पब्रश एवं पॉलिटीन क्रोमोसोम्स 

(Lampbrush and Polytene chromosome) Notes

 

क्रo

संo

लैम्पब्रश क्रोमोसोम

 

पाँलिटीन क्रोमोसोम
1. ये प्राथमिक अण्डक (primary oocyte) केन्द्रकों में पाए जाते हैं। ये क्रोमोसोम प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन की दीर्घ द्विपट्ट अवस्था (diplotene) में तथा ड्रोसोफिला की शुक्राणु कोशिका के केन्द्रकों में पाए जाते हैं तथा आकार में बड़े होते हैं।

 

ये द्विपंखी जातियों की लार ग्रन्थि की कोशिकाओं में देखे गए थे। ये आकार में बहुत बड़े थे। ये कायिक कोशिका (somatic cells) में भी युग्मित रहते हैं।

 

2. इनमें पायी जाने वाली अधिकतर वर्णकणिकाओं (chromomeres) से युग्मों में पाए जाने वाले लूप उभरे रहते हैं। अकेली एक वर्णकणिका में 1 से 9 लूप निकल सकते हैं।

 

इन महागुणसूत्रों में अनुप्रस्थ पट्टियाँ पायी जाती हैं जो एकान्तर वणिक

(chromatic) तथा अवर्णिक भागों में बनी होती हैं। कभी-कभी ये पट्टियाँ उत्क्रमणीय

(reversible) ‘पफ’ (puffs) भी बनाती हैं, जिन्हें ‘गुणसूत्र पफ’

(chromosomes puffs) या ‘बैल्बियानी वलय’ (Balbiani rings)

कहते हैं।

 

 

3. वर्णकणिकाएँ अन्तःक्रोमोमेरिक रेशों द्वारा आपस में जडी रहती हैं। युग्मी लूपों के होने से ये लैम्पब्रश के समान दिखाई देने लगते कभी-कभी इन लूपों में एक पतली अक्ष भी दिखाई देती है जो शायद DNA की अक्ष से रेशे निकलते हैं जो RNA तथा प्रोटीन के बने एक मैट्रिक्स से

ढके रहते हैं।

 

महागुणसूत्र, रेशकों के एक बण्डल को निरूपित करते हैं। ये रेशक अर्द्ध-गणसूत्रों

के बारम्बार अन्तः प्रतिवलनपों

(endo-reduplication) के द्वारा बनते हैं अर्थात् इनमें कोशिका विभाजन के बिना

ही क्रोमैटिन पुनरावर्तित होता रहता है जिसके फलस्वरूप वर्णसूत्रों की संख्या निरन्तर बढती रहती हैं। अतः इन्हे बहुपट्टीय (polytene) गुणसुत्र भी कहते हैं। प्रति गुणसूत्र में वर्णसूत्रों या रेशकों की संख्या 2000 तक हो सकती है।

 

 

प्रश्न 28 – जीन धारणा क्या है ?

What is Gene concept ?

उत्तर –

जीन धारणा 

(Gene concept) Notes

बी० लेविस (E.B. Lewis) ने सन् 1951 ई० में ड्रोसोफिला पर किए गए उपयोगों में पाया कि एप्रिकॉट रंग के नेत्र वाली और श्वेत नेत्र वाली मक्खियों के संकरण (cross) से उसे F1 सन्तति में मध्यवर्ती रंग के नेत्र वाली मक्खियाँ प्राप्त हुईं। F2 सन्तति नाकार में में उन्होंने केवल एप्रिकॉट एवं श्वेत रंगों के विसंयोजन की आशा की थी, परन्तु F2

सन्तति में वन्य (wild) प्ररूप वाली मक्खी के प्राप्त होने पर वह आश्चर्यचकित रह गए। इससे यह निष्कर्ष अनिवार्य था कि प्रयोग में उपयोग किए गए दोनों युग्मविकल्पी वास्तव में अयुग्मविकल्पी थे। यदि a और b अयुग्मविकल्पी हैं तो उनके जनकों का निरूपण aaBB और AAbb लिखा जाना चाहिए और तब ही F2 सन्तति में वन्य प्ररूप (AB) प्राप्त हो सकेगा। परन्तु उपलब्ध ज्ञान के अनुसार ये एप्रिकॉट और श्वेत रंग के कारक युग्मविकल्पी जाने जाते थे, जबकि उनका व्यवहार अयुग्मविकल्पी वाला था, अत: लेविस उन्हें कूटयुग्मविकल्पी (pseudoalleles) तथा इस परिघटना को कूटयुग्मविकल्पी , pseudoallelism) कहा। बाद में Pontecorvo ने इसे लेविस प्रभाव कहना अधिक उचित समझा। ffs) भी

Aa    x    bb

F2 1. If wild type appears, a and b are non-allelic.

  1. If no wild type appears, a and b are allelic.

F1 सन्तति के a+/+b जीन प्ररूप वाले जीनों में स्थान प्रभाव (position effect) के – कारण वन्य प्ररूप प्रगट नहीं हो पाता है। जीन विनिमय के फलस्वरूप F1 सन्तति के जीवों से ++ और ab युग्मक बन जाते हैं। जिन से F2 सन्तति में ++/++ अथवा ++/ab के रूप में वन्य प्ररूप प्राप्त होते हैं। यह वास्तव में प्रदर्शित भी किया जा चुका है कि एक जीन के लिए ++/ab तथा a+/+b जीन प्ररूप विभिन्न लक्षण प्ररूप प्रगट कर सकते हैं। इसको सिसट्रान्स प्रभाव (cis-trans effect) कहते हैं। …

++       a+

a b       +b

cis and trans arrangements of alleles a and b in heterozygous pndition.

प्रश्न 29 – बहुयुग्मविकल्पी क्या है

What are Multiple alleles ?

अथवा बहुकारक पर टिप्पणी लिखिए। 

Write short note on Multiple alleles. 

उत्तर – 

बहुयुग्मविकल्पी 

(Multiple alleles)  Notes

मेण्डल के अनुसार जीन अथवा कारक के केवल दो विकल्पी रूप होते हैं अर्थात ।

प्रत्येक जीन के दो विकल्पी रूप होंगे जिनमें से एक प्रभावी और दूसरा अप्रभावी। इनमें

से एक उत्परिवर्ती रूप और दूसरा वन्य (wild) रूप माना गया था। यदि उत्परिवर्ती रूप वन्य रूप से उत्परिवर्तन के कारण उत्पन्न होता है तो वन्य रूप एक से अधिक रूप भी।

उत्परिवर्तन द्वारा प्राप्त हो सकते हैं। उत्परिवर्ती रूप में फिर से भी परिवर्तन हो सकता है  जिससे एक अन्य उत्परिवर्ती रूप भी बन सकता है। अतः एक जीन के दो से अधिक विकल्पी रूप हो सकते हैं क्योंकि बहुयुग्मविकल्पियों के बीच कोई साधारण प्रभावी-अप्रभावी सम्बन्ध होना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 30 – मेण्डल की सफलता के कारण स्पष्ट कीजिए। 

Describe the reasons for Mendel’s Success. 

उत्तर

मेण्डल की सफलता के कारण

 (Reasons for Mendel’s Success) Notes

(1) मटर का पौधा एकवर्षीय होता है। इसकी जीवन-अवधि 3 या 4 माह होती है। अत: अनेक पीढ़ियों का अध्ययन सुगमता से किया जा सकता है।

(2) पुष्प उभयलिंगी (bisexual) होते हैं।

(3) मटर के पुष्पों में सामान्यतः स्वपरागण (self pollination) होता है। स्वनिषेचन के कारण मटर के पौधे समयुग्मजी (homozygous) होते हैं। अतः पीढ़ी-दर-पीढ़ी इनके पौधे शुद्ध लक्षण वाले बने रहते हैं।

(4) इनमें कृत्रिम परपरागण (artificial cross pollination) सुगमता से कराया पहचाना जा जा सकता है।

(5) कृत्रिम संकरण द्वारा प्राप्त संकर (hybrid) पादप जननश्न (fertile) होते हैं।

(6) मटर के पौधे में अनेक तुलनात्मक लक्षण पाए जाते हैं। मेण्डल ने अपने प्रयोगों के लिए सात तुलनात्मक लक्षणों जैसे लम्बा तथा बौना तना, को चुना।

(7) मेण्डल भाग्यशाली रहे कि उन्होंने जिन सात तुलनात्मक लक्षणों का चयन किया वे सभी प्रभावीअप्रभावी थे। इन लक्षणों को अग्रांकित तालिका में प्रदर्शित गया है।

तालिका – मटर के पौधे के सात जोडी तुलनात्मक लक्षण

क्रo

संo

लक्षण गुणसूत्र सं0 पर स्थिति प्रभावी लक्षण अप्रभावी
1. बीज का आकार 7 गोल झुर्रीदार
2. बीजपत्र का रंग 1 पीला हरा
3. पुष्प का रंग 1 बैंगनी सफेद
4. फली का रंग 5 हरा पीला
5. फली का आकार 4 फूला हुआ संकुचित
6. पुष्प की स्थिति 4 अक्षीय शीर्षस्थ
7. तने की लम्बाई 4 लम्बा बोना

 

इन तुलनात्मक लक्षणों को युग्मविकल्पी या ऐलीलोमॉर्फ (allelomorphs) कहते हैं। प्रत्येक जोड़ी के दोनों गुण एक-दूसरे के युग्मविकल्पी (allele) होते हैं।

प्रश्न 31 – क्रिसक्रॉस आनुवंशिकता से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। 

What do you understand by Criss-cross inheritance ? Explain with examples. 

उत्तर

क्रिसक्रॉ आनुवंशिकता 

(Criss-cross Inheritance) Notes

x तथा y गुणसूत्र आकारिक रूप से भिन्न होते हैं और इन्हें सूक्ष्मदर्शी द्वारा – पहचाना जा सकता है। पुरुष में XY लिंग गुणसूत्र तथा स्त्री में XX गुणसूत्र होते हैं। पुरुष

से x गुणसूत्र पुत्री को तथा Y गुणसूत्र पुत्र को मिलता है। स्त्री से एक X गुणसूत्र पुत्री को तथा दूसरा X. गुणसूत्र पुत्र को मिलता है। इससे स्पष्ट है कि पुत्र में x गुणसूत्रों की वंशागति F1 पीढ़ी की मादा द्वारा होती है, यही द्वितीय पीढ़ी के पुत्रों को वंशागत होती है। अतः यदि मादा जनक में अप्रभावी लक्षण समयुग्मजी (homozygous) दशा में और नर जनक में प्रभावी युग्मविकल्पी हैं तो F1 सन्तति में प्राप्त होने वाले मादा जीव का यन का लक्षणप्ररूप सदा प्रभावी, परन्तु विषमयुग्मजी होगा और नर जीव में केवल अप्रभावी लक्षणप्ररूप होंगे। इसके पश्चात् यदि F सन्तति के जीवों में पारस्परिक संकरण होने दिया जाता है तो लिंग के अनुसार एक क्रिस-क्रॉस प्रकार की वंशागति प्राप्त होती है। इस प्रकार पिता का लक्षण F1 सन्तति में पुत्री में जाता है और फिर F2 सन्तति में यही लक्षण पुत्र जब से अगली सन्तति में जाता है।

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प्रश्न 32 – एक Rh निगेटिव स्त्री को Rh पॉजीटिव पुरुष से विवाह नहीं कर लिए फीटस चाहिए। उपर्युक्त के लिए वैज्ञानिक कारण बताइए। 

Rh negative women should not marry with Rh positive man. Explain scientific reason for this. 

अथवा एरिथोब्लोस्टोसिस फीटेलिस का संक्षेप में वर्णन करें। 

Describe in brief Erythroblastosis foetalis.” 

उत्तर Rh निगेटिव स्त्री की Rh पॉजीटिव मनुष्य से शादी होने पर वह पाँजीवी गर्भधारण करने पर सुग्राही (sensitised) हो जाती है। गर्भ के परिवर्द्धन के समय भ्रूण कुछ कोशिकाएँ माता के रुधिर में मिल जाती हैं। इस प्रकार माता-पिता की प्रथम सन्तान लगभग सामान्य होती है। माता को सुग्राही बनाने के लिए कम-से-कम एक सगर्भता आवश्यक है, किन्तु दूसरी सगर्भता की स्थिति में माता की एण्टीबॉडीज प्लेसेण्टा द्वारा गर्भ में पहुँचकर उसकी लाल रुधिर कणिकाओं को क्षति पहुँचाती हैं। इसके फलस्वरूप एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस नामक रोग हो जाता है। यह एक प्रकार का एनीमिया (anaemia) है जो गर्भ में लाल रुधिर कणिकाओं के नष्ट होने से उत्पन्न होता है। इसके फलस्वरूप विघटित कोशिकाएँ यकृत की रुधिर वाहिनियों को रुद्ध कर देती हैं और अब रुधिर पित्त का अवशोषण करता है। यह रोग घातक होता है। इस रोग में शिशु की जन्म से पहले ही अथवा जन्म के कुछ दिनों बाद मृत्यु हो जाती है। रुधिर कणिकाओं के रुधिरलयन (haemolysis) के कारण इसे हीमोलाइटिस रोग भी कहते हैं।

Mother                        Father

Rh+              (RR)­

(rr)           x         Rh

Children

Rh+ All Rr

प्रश्न 33 उल्बेवेधनं या ऐम्नियोसेन्टेसिस क्या है?

What is Amniocentesis ?

उत्तर – 

ऐम्नियोसेन्टेसिस

(Amniocentesis) Notes

जब एक गर्भवती स्त्री को माँ बनने का अवसर मिलता है जिसमें शिशु को जेनेरिक व्याधि का भय होता है, ऐसी दशा में फीटस की अवस्था जानना आवश्यक होता है। इसके लिए फीटस से कुछ कोशिकाएँ तथा कुछ मिलीलीटर ऐम्नियोटिक द्रव्य हाइपोडर्मिक सुई की सहायता से निकाला जाता है। कोशिकाओं तथा ऐम्नियोटिक द्रव्य का इस प्रकार से निकालने की प्रक्रिया को ऐम्नियोसेन्टेसिस कहते हैं। यह प्रायः गर्भ के 15वें सप्ताह में किया जाता है जिससे यदि सम्भव हो तो गर्भ को समाप्त किया जा सके।

ऐम्नियोटिक द्रव्य में फीटस की कुछ कोशिकाएँ होती हैं जिनका कल्चर करके विभिन्न प्रकार से परीक्षण (Test) किया जाता है। उदाहरणार्थकेरिओटाइप, एन्जाइम : उत्पादन तथा डी०एन०ए० का analysis.

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प्रश्न 34 –  दात्रकोशिका अरक्तता क्या है?

What is Sickle-cell anaemia?

उत्तर  – 

दात्रकोशिका रक्तता

(Sickle-cell anaemia) Notes

दात्र – कोशिका अरक्तता एक रुधिर रोग है जिसमें लाल रुधिर कणिकाएँ सामान्य कणिकाओं की तरह वृत्ताकार न होकर घनाकार हो जाती हैं। इस रोग के फलस्वरूप बहुत-सी असमानताएँ उत्पन्न होती हैं और अन्त में मृत्यु हो सकती है। यह रोग केवल एक जीन में विकास द्वारा उत्पन्न होता है। विषमयुग्मजी दशा में यह मध्यम प्रभाव उत्पन्न करता है और समयग्मज दशा में गम्भीर प्रभाव अर्थात् दात्र कोशिका अरक्तता उत्पन्न करता है। दात्र कोशिका अरक्तता का हीमोग्लोबिन सामान्य हीमोग्लोबिन की गति की दिशा के विपरीत दिशा में गति करता है हीमोग्लोबिन की 8 श्रृंखला में केवल छठे स्थान पर एक ऐमीनो अम्ल ग्लटेमिक अम्ल (glu) के वैलीन (val) द्वारा प्रतिस्थापन के कारण ही यह भिन्नता होती है।

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प्रश्न 35 ड्रोसोफिला में लिंगसहलग्नता स्पष्ट कीजिए।

Explain the Sex-linked Inheritance in Drosophila

उत्तर

ड्रोसोफिला में लिंग-सहलग्नता

(Sex-linked Inheritance in Drosophila) Notes

श्वेत नेत्र वाली मादा x लाल नेत्र वाला नर

ड्रोसोफिला में श्वेत नेत्र रंग सामान्य लाल नेत्र रंग के प्रति अप्रभावी होता है। यदि श्वेत नेत्र वाली मादा मक्खी का लाल नेत्र वाली नर मक्खी से संकरण कराया जाता है तो F1 सन्तति में समस्त मादा लाल नेत्र वाली और समस्त नर श्वेत नेत्र वाले होते हैं। जब F1 सन्तति में प्राप्त इन लाल नेत्र वाली मादा मक्खियों का इसी सन्तति की श्वेत नेत्र वाली नर मक्खियों के साथ संकरण कराया जाता है तो F2 सन्तति में प्राप्त कुल मादा मक्खियों में 50% लाल नेत्र वाली तथा 50% श्वेत नेत्र वाली होती हैं। इसी प्रकार कुल प्राप्त नर मक्खियों में 50% लाल नेत्र वाली और 50% श्वेत नेत्र वाली होती हैं।

लिंग-गुणसूत्र पर स्थित एक विशिष्ट लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में लिंग को बदलता है अर्थात् एक लिंग-सहलग्नी लक्षण माता से पुत्र में स्थानान्तरित होता है और पिता से पुत्र में कभी नहीं जाता।

गुणसूत्र image

प्रश्न 36 – शिखरस्थ या अग्रबिन्दु गुणसूत्र पर टिप्पणी लिखिए। .

उत्तर

शिखरस्थ या अग्रबिन्दु गुणसूत्र 

(Acrocentric Chromosome) Notes

कोशिका वृद्धि तथा कोशिका विभाजन के सम्पूर्ण प्रक्रम में गुणसूत्रों का आकार, प्रत्येक अवस्था में परिवर्तित होता रहता है। विश्रामावस्था में गुणसूत्र पतले, लम्बे, कुण्डलित, लचीली तथा संकुचित अवस्था में पाए जाते हैं तथा क्रोमैटिन धागे कहलाते हैं। गुणसूत्रों के आकार का निर्धारण प्राथमिक संकुचन या गुणसूत्र बिन्दु या सेन्ट्रोमीयर

(centromere) के द्वारा किया जाता है। प्रत्येक गुणसूत्र पर एक स्पष्ट क्षेत्र होता है, जिसे गुणसूत्र बिन्दु कहते हैं। गुणसूत्र बिन्दु वह भाग है जिसके द्वारा गुणसूत्र गुणसूत्रीय भुजा (chromosomal arm) में विभक्त रहता है। प्रत्येक गुणसूत्र में गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति भी भिन्न-भिन्न होती है, जिसके आधार पर गुणसूत्रों को विभाजित किया जाता है। शिखरस्थ या अग्रबिन्दु गुणसूत्र भी उसी आधार पर विभाजित गुणसूत्र होता है। यह छड़ाकार होता है। इसमें गुणसूत्र बिन्दु एक शीर्ष पर या गुणसूत्र के अग्रबिन्दु पर व्यवस्थित रहता है, इस अवस्था में गुणसूत्र की एक भुजा अधिक लम्बी तथा दूसरी भुजा अत्यधिक छोटी होती है।

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प्रश्न 37 – समयुग्मजी एवं विषमयुग्मजी पर टिप्पणी कीजिए।

Write note on Homozygous and Heterozygous. 

उत्तर युग्मविकल्पी शब्द जिसका लघ रूप एलील (allele) है और जिसका अर्थ एक हा जोन के भिन्न रूपों से है, एक ही जीन के विकल्पी रूपों को प्रकट करते हैं। उदाहरणार्थ, पौधे की लम्बाई के लिए काल्पनिक जीन के ‘T’ और ‘t’ दो युग्मविकल्पा है। शुद्ध लम्बे (TT) अथवा शुद्ध बौने (tt) पौधों में एक ही प्रकार के यग्मविकल्पी पाए जाते हैं, जबकि लम्बे संकर (Tt) पौधों में दोनों प्रकार के युग्मविकल्पी उपस्थित होते हैं।।

ऐसे जीव जिनमें केवल एक ही युग्मविकल्पी होता है अथवा दोनों समान युग्मविकल्पी होते हैं, समयुग्मजी (homozygous : TT or tt) कहलाते हैं। इसी प्रकार दो . अलग-अलग युग्मविकल्पियों वाले जीव को विषमयुग्मजी (heterozygous) या संकर (hybrid : Tt) कहते हैं।

प्रश्न 38 – मध्यकेन्द्री उपमध्यकेन्द्री गुणसूत्र पर टिप्पणी कीजिए।

Write note on Metacentric and submetacentrid … chromosome. 

उत्तर

मध्यकेन्द्री गुणसूत्र

(Metacentric chromosome)- Notes

ये गुणसूत्र x आकार के होते हैं जिनमें गुणसूत्र बिन्दु (centromere) मध्य में उपस्थित रहता है जिसके Baral कारण दोनों गुणसूत्री भुजाएँ (chromosomal arms) लगभग बराबर होती हैं। मानव 5 गुणसूत्र-1, 3, 16, 19 तथा 20 मध्यकेन्द्री गुणसूत्र होते हैं।

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उपमध्यकेन्द्री गुणसूत्र (Submetacentric chromosome)-ऐसे गुणसूत्र जिनमें गुणसूत्र बिन्दु मध्य में उपस्थित नहीं होता जिसके कारण गुणसूत्री भुजाएँ असमान होती हैं। मानव में 2, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 17, 18 तथा ‘x’ गुणसूत्र उपमध्यकेन्द्री गुणसूत्र होते हैं।

प्रश्न 39 – यदि डी०एन०ए० के एक भाग में एडिनीन की मात्रा 20 प्रतिशत है तब इसमें साइटोसिन की मात्रा कितनी होगी

If in a DNA segment adenine is 20%. What will be the percentage of cytosine in this segment ? 

उत्तर एक डी०एन०ए० में एडिनीन तथा थाइमीन तथा साइटोसिन एवं ग्वानीन आपस में एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं। अत: एडिनीन अगर 20% है तो इतनी ही मात्रा थाइमीन की होगी। उपर्युक्त खण्ड में 40% मात्रा थाइमीन एवं एडिनीन की होगी तथा 60% मात्रा ग्वानीन एवं साइटोसिन की होगी। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि 30% मात्रा साइटोसिन की होगी।

 


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