What Voltage Regulation Notes

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What Voltage Regulation Notes:- Transistor biasing circuits base bias, emitter bias, and voltage divider .bias, D.C. load line. Basic A.C. equivalent circuits, low-frequency model, small-signal amplifiers, common emitter amplifier, common collector amplifiers, and common base amplifiers, current and voltage gain, R.C. coupled amplifier, gain, frequency response, the equivalent circuit at low medium and high frequencies, feedback principles.

 

 

प्रश्न 17. वोल्टेज नियन्त्रण से आप क्या समझते हैं? परिपथ चित्र देते हुए समझाइए कि जेनर डायोड से वोल्टेज नियन्त्रण किस प्रकार होता है

What is the Voltage Regulation? Explain using a circuit diagram, how is it achieved by means of a Zener diode? 

 

उत्तर : वोल्टेज नियन्त्रण अथवा वोल्टेज स्थायीकरण (Voltage Regulation or Voltage Stabilization)-किसी साधारण शक्ति सम्भरण के निर्गत सिरों के बीच उपलब्ध दिष्ट धारा वोल्टेज लोड धारा पर निर्भर करता है। यदि लोड धारा बढ़ती है तो शक्ति सम्भरण के अवयवों (ट्रांसफॉर्मर द्वितीयक, दिष्टकारी डायोड, फिल्टर, इत्यादि) में विभवपतन बढ़ जाता है जिससे निर्गत दिष्ट धारा वोल्टेज घट जाता है। लोड धारा में परिवर्तन होने पर निर्गत दिष्ट धारा वोल्टेज जिस कोटि (degree) तक बदलता है, उसे वोल्टेज नियन्त्रण कहते हैं। प्रतिशत वोल्टेज नियन्त्रण निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जाता है

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वोल्टेज नियन्त्रण जितना कम होगा, शून्य लोड वोल्टेज तथा सम्पूर्ण लोड वोल्टेज में अन्तर उतना ही कम होगा तथा शक्ति सम्भरण (power supply) उतना ही उत्तम माना जाएगा। एक आदर्श शक्ति सम्भरण का सम्पूर्ण लोड वोल्टेज इसके शून्य लोड वोल्टेज के बराबर होता है, अत: वोल्टेज नियन्त्रण शून्य होता है।

 

वोल्टेज नियन्त्रक (Voltage Regulator)—वह युक्ति जो शक्ति सम्भरण से निर्गत वोल्टेज को नियत बनाए रखती है, चाहे निवेशी प्रत्यावर्ती धारा वोल्टेज में कोई परिवर्तन हो अथवा लोड में,  नियन्त्रक कहलाती है।

वोल्टेज नियन्त्रक कई प्रकार के होते हैं। सर्वाधिक प्रचलित वोल्टेज नियन्त्रकों में या तो अकेला जेनर डायोड प्रयुक्त होता है अथवा जेनर डायोड के साथ एक ट्रांजिस्टर प्रयुक्त होता है। इन्हें क्रमश: जेनर डायोड पार्श्व वोल्टेज नियन्त्रक (Zener diode shunt voltage regulator) तथा ट्रांजिस्टर श्रेणी वोल्टेज नियन्त्रक (transistor series voltage regulator) कहते हैं।

 

जेनर डायोड पार्श्व वोल्टेज नियन्त्रक (Zener Diode Shunt Voltage Regulator)-जेनर डायोड का वोल्टेज नियन्त्रक के रूप में कार्य इस तथ्य पर आधारित है कि भंजक क्षेत्र (breakdown region) में डायोड (अथवा जेनर) धारा में काफी बड़े परिवर्तन होने पर भी डायोड के सिरों के बीच (उत्क्रम) वोल्टेज लगभग नियत बना रहता है। यदि निवेशी वोल्टेज अथवा लोड धारा में परिवर्तन होते हैं तो जेनर धारा इन परिवर्तनों के अनुरूप इस प्रकार समंजित हो जाती है कि लोड के सिरों के बीच वोल्टेज लगभग नियत  बना रहता है।

चित्र-49 में जेनर डायोड पार्श्व वोल्टेज नियन्त्रक का एक साधारण परिपथ दर्शाया गया है। इसमें एक श्रेणी वोल्टेजपाती (series voltage dropping) प्रतिरोध R तथा एक जेनर डायोड n-p होता है जिसके समान्तर में वह लोड प्रतिरोध RL होता है जिसके सिरों के बीच नियत वोल्टेज Vo स्थापित करना होता है। जेनर डायोड ऐसा चुनते हैं जिसका जेनर वोल्टेज Vz, इच्छित निर्गत वोल्टेज Vo के बराबर हो। डायोड के सिरे प्रतिरोध R के द्वारा शक्ति सम्भरण के निर्गत सिरों से, जिनके बीच अनियन्त्रित वोल्टेज V उत्पन्न होता है, उत्क्रम अभिनति में जोड़ देते हैं। यदि श्रेणी प्रतिरोध R का मान ऐसा चुना गया है कि जेनर डायोड जेनर वोल्टेज VZ के अन्तर्गत भंजक क्षेत्र में कार्यरत हो तो लोड RL के सिरों के बीच निर्गत वोल्टेज Vo नियत बना रहता है (Vz के बराबर), भले ही सप्लाई वोल्टेज V अथवा लोड प्रतिरोध RT में परिवर्तन हो रहा हो।

 

व्याख्या (Explanation)-माना सप्लाई वोल्टेज V बढ़ता है, जबकि लोड प्रतिरोध RL नियत रहता है। चूँकि जेनर डायोड भंजक क्षेत्र में कार्यरत है, अत: इसके सिरों के बीच वोल्टेज Vz ही बना रहता है तथा इसके समान्तर में लोड RL के सिरों के बीच निर्गत वोल्टेज Vo भी Vz पर नियत रहता है। सप्लाई वोल्टेज में हुई वृद्धि श्रेणी प्रतिरोध R में विभवपाती हा जाती है। इससे सप्लाई से आने वाली मुख्य धारा बढ़ती है, धारा में यह वृद्धि पूर्णत: जेनर डायोड चली जाती है, अर्थात् जेनर धारा iz बढ़ जाती है, जबकि लोड धारा iL नियत बनी रहता हा दस प्रकार सप्लाई वोल्टेज V में परिवर्तन होने पर निर्गत वोल्टेज Vo नियत बना रहता है।

 

सप्लाई वोल्टेज V में होने वाली वृद्धि प्रतिरोध RL में विभवपाती होती है तथा लोड के सिरा के बीच निर्गत वोल्टेज Vz पर नियत रहता है। अतः यदि सप्लाई वोल्टेज V का मान Vz से नीचा हो, तब जेनर डायोड नियत निर्गत वोल्टेज नहीं दे सकता

 

अब माना सप्लाई वोल्टेज V तो नियत रहता है, परन्तु लोड प्रतिरोध RL घट जाता है। इससे लोड धारा iL बढ़ती है। यह वृद्धि प्रतिरोध R में होने वाले विभवपतन से नहीं आ सकती। अतः धारा i नहीं बदलती। वास्तव में लोड धारा में होने वाली वृद्धि जेनर धारा iL में उतनी ही कमी होने से पूरी हो जाती है। अतः निर्गत वोल्टेज Vo नियत बना रहता है।

 

श्रेणी प्रतिरोध R का आवश्यक मान (Essential value of series resistance, R)-प्रतिरोध R के सिरों के बीच विभवपतन V – Vo है तथा इसमें धारा । है। अत: ओम के नियम से,

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जहाँ i = iz +iL, जिसमें iL का औसत मान प्रयुक्त होगा।

 

सीमाएँ (Limitations)-(1) जेनर डायोड वोल्टेज नियन्त्रक बहुत प्रबल लोड धाराओं के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि तब विभवपाती श्रेणी प्रतिरोध R में बहुत अधिक शक्ति , क्षय (power loss) होगा।

(2) निर्गत वोल्टेज में जेनर डायोड की आन्तरिक प्रतिबाधा Zz के कारण परिवर्तन हो । जाता है (Vo = Vz +izZz )| लोड धारा में परिवर्तन होने से जेनर धारा iz में परिवर्तन होता है जिससे निर्गत वोल्टेज Vo में परिवर्तन हो जाता है।


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