Mature Sporogonium Of Anthoceros BSc Botany Notes

Mature Sporogonium Of Anthoceros BSc Botany Notes

 

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प्रश्न 3 – एन्थोसिरोस के परिपक्व स्पोरोगोनियम की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। 

उत्तर

एन्थोसिरोस की परिपक्व स्पोरोगोनियम 

(Mature Sporogonium of Anthoceros)

परिपक्व स्पोरोगोनियम में धंसा हुआ पाद व एक चिकना, लम्बा, ऊर्ध्व, बेलनाकार कैप्सूल मिलता है जिसकी लम्बाई 2-3 सेमी से 15 सेमी तक या अधिक होती है।

इन कैप्सूल के काँटे या हॉर्न के रूप में सूकाय के ऊपर निकले रहने के कारण ही इन पादपों को हॉर्नवर्ट कहते. हैं। इनमें सीटा अनुपस्थित होता है, परन्तु उसके स्थान पर मेरिस्टिमेटिक (विभज्योतक) क्षेत्र कैप्सूल व पाद के मध्य मिलता है। –

फट (पाद) फूला हुआ (bulbous) होता है। यह सामान्यतः चूषकीय होता है तथा मादा युग्मकोद्भिद् में गहराई तक धंसा रहता है। यह मृदूतकीय होता है। ___

कैप्सूल कई प्रकार के ऊतकों से बनता है। इसके मध्य में बन्ध्य कॉल्यूमेला मिलती है। कॉल्यूमेला की कोशिकाएँ ऊर्ध्व दीर्घित (vertically elongated) तथा मोटी भित्ति की होती हैं। इसका कार्य पानी का संवहन करना है। कॉल्यूमेला का मुख्य कार्य लम्बे पतले स्पोरोगोनियम को ऊर्ध्व रखना तथा बीजाण्ड के प्रकीर्णन में सहायता करना है।

कॉल्यूमेला के बाहर की ओर एक अथवा बहस्तरीय आर्किस्पोरियम मिलती है। यह आधार पर अपरिपक्व, परन्तु शीर्ष पर परिपक्व होती है जिससे इसमें बीजाणु व कूट इलेटर बनते हैं। कूट इलेटर कुछ प्रजातियों में लम्बी कतारों में मिलते हैं। कैप्सूल की भित्ति 4-6 स्तरीय होती है। बाह्य परत पर स्टोमेटा मिलते हैं तथा इसके भीतर की परत की कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट मिलते हैं। इस प्रकार ये आंशिक परजीवी होते हैं। ये भोजन स्वयं बना सकते है, परन्तु पानी व खनिज के लिए मादा युग्मकोदभिद पर निर्भर होते हैं। ऐसा देखा गया है। फुट (पाद) किसी कारण पादप से हटकर मृदा में धंस जाए तो स्वतन्त्र होता है। यह मृदा से पोषक तत्त्व व पानी प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार की परिस्थितियों ए० फ्यूसीफॉर्मिसमें केम्पबेल ने देखीं, उन्होंने एन्थोसिरोटेल्स व जीवाश्म राइनिया व हानियोफाइटान में समानता भी बताई।

कैप्सूल का स्फुटन (Dehiscence of Capsule) Notes

कैप्सूल का स्फुटन तलाभिसारी होता है। परिपक्व कैप्सूल ऊपर से नीचे की ओर फटता है। फटने से पूर्व कैप्सूल भरा या काला हो जाता है। वातावरण से नमी पाकर इसकी भित्ति फट जाती है और कूट इलेटर के बाहर आने से बीजाणु स्वतन्त्र हो जाते हैं।

Mature Sporogonium Of Anthoceros
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बीजाणु (Spores) Notes

प्रत्येक बीजाणु अगुणित, एककेन्द्रकीय संरचना है जिसमें एक क्लोरोप्लास्ट भी मिलता है। बीजाणु की भित्ति द्विपरती (bilayered) होती है। इसकी बाह्य भित्ति को एक्सोस्पोर (exospore) तथा अन्दर की भित्ति को एन्डोस्पोर (endospore) कहते हैं। कोशिकाद्रव्य में रेल गोलिकाएँ व संचित खाद्य भी मिलता है। परिपक्व बीजाणु काला अथवा भूरा होता है जैसे ए० इरेक्टस, ए० पन्कटेटस आदि अथवा पीला जैसे ए० लीविस तथा ए० हिमालयन्सिस में होता है।

 


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