Explain the Principle Regenerative Cooling

Explain the Principle Regenerative Cooling

Explain the Principle Regenerative Cooling:-The Zeroth law, various indicator diagrams, work done by and on the system, first law of thermodynamics. internal energy as a state function and other applications. Reversible and irreversible changes. Carnot cycle and its efficiency, Carnot theorem and the second law of thermodynamics. Different versions of the second law, practical cycles used in internal combustion engines. Entropy, principle of increase of entropy. The thermodynamic scale of temperature, its identity with the perfect gas scale. Impossibility of attaining the absolute zero, third law of thermodynamics.

 

रश्न 8. पुन:निर्वेशी शीतलन के सिद्धान्त को समझाइए तथा He को द्रवित करने  की एक विधि सचित्र बताइए। 

Explain the principle of regenerative cooling. Also, describe a method of liquifying He, with the help of labeled diagram. 

 

उत्तर : पुनःनिर्देशी शीतलन का सिद्धान्त (Principle of Regenerative chaling)— जब किसी गैस को ऊँचे दाब पर किसी महीन सरन्ध्र डाट में से नीचे दाब की और प्रवाहित करते हैं तो गैस के ताप में परिवर्तन होता है। यदि गैस का प्रारम्भिक ताप इसक व्युत्क्रमण ताप से नीचे है, तब डाट में से निकलने पर गैस के ताप में कमी होती है। गैस का प्रारम्भिक ताप जितना नीचा होता है, गैस उतनी ही ठण्डी होती है। अत: यदि इस ठण्डी गैस का उस नलिका के ऊपर प्रवाहित करें जिससे होकर गैस डाट में से निकल रही है. तब आने वाला गैस पहले से ठण्डी हो जाती है तथा डाट से निकलने पर और अधिक ठण्डी हो जाती है। इस ‘प्रक्रिया को बार-बार दोहराने पर, डाट से निकलने वाली गैस अधिकाधिक ठण्डी होती जाती है। तथा अन्त में द्रवित हो जाती है। इस प्रक्रिया को पुन:निर्वेशी शीतलन कहते हैं। .

कैपित्जा का हीलियम द्रवित्र (Kapitza’s Helium Liquefier) कापजा न सन् 1934 ई० में क्लाउडे की विधि पर आधारित एक अन्य हीलियम द्रवित्र बनाया जिसमें रुद्धोष्म प्रसार तथा जूल-टॉमसन प्रसार दोनों को प्रयुक्त किया। इसमें एक विशिष्ट प्रसार इंजन का उपयोग किया गया। इसमें किसी स्नेहक का प्रयोग नहीं किया गया। इस इंजन के सिलिण्डर में पिस्टन इस प्रकार व्यवस्थित किया गया था जिससे उनके मध्य कुछ रिक्त स्थान रह जाए। यद्यपि गैस को प्रसारित करने पर कुछ गैस इस स्थान में से निकल जाती थी, परन्तु यह प्रसार इतनी शीघ्रता से होता था कि निकलने वाली गैस की मात्रा नगण्य होती थी।

कैपित्जा के हीलियम द्रवित्र का स्वरूप चित्र-13 में दर्शाया गया है। इस चित्र में रेखाओं द्वारा नलिकाओं को प्रदर्शित किया गया, जिनमें हीलियम प्रवाहित होती है तथा हीलियम गैस को तीर के चिह्न द्वारा दर्शाया गया है। शुद्ध हीलियम गैस को 30 वायुमण्डल दाब तक संपीडित करके . ऊष्मा-विनिमयक A में भेजा जाता है। पुनः इसे निम्न दाब पर वाष्पित द्रव-नाइट्रोजन से भरे वलयाकारं पात्र NN में प्रवाहित करते हैं। वहाँ गैस का ताप-208°C तक गिर जाता है। शीतल गैस अब ऊष्मा विनिमयक B से गुजरती है तथा एक स्थान K पर दो

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भागों में विभक्त हो जाती है। गैस का 8% भाग एक प्रसार-वाल्व V, में से गुजरता है तथा 92% भाग एक प्रसार-इंजन E में चला जाता है, जहाँ रुद्धोष्म प्रसार के द्वारा इसका ताप -263°C तक गिर जाता है। इस प्रकार शीतल हुई गैस वापस ऊष्मा-विनिमयकों C.Bतथा A में को प्रवाहित होती है और प्रविष्ट होने वाली गैस को ठण्डा करती हुई, वापस संपीडक में 1 वायुमण्डल दाब पर पहुँच जाती है। प्रसार-वाल्व V1 में से गुजरने वाली 8% गैस का जूल-टॉमसन प्रसार होता है। इसके पश्चात् यह गैस ऊष्मा-विनिमयकों C व D में से गुजरती है तथा वाल्व V, में से गुजरते समय पुनः इसका जूल-टॉमसन प्रसार होता है तथा इसका ताप -268°C तक गिर जाता है। कुछ गैस द्रवित होकर फ्लास्क F में एकत्र हो जाती है. शेष अद्रवित गैस पुन: ऊष्मा-विनिमयकों D,C,B,A में से प्रवाहित होती हुई संपीडक में वापस चली जाती है।

यह द्रवित्र बहुत दक्ष तथा ओनेस के द्रवित्र से सस्ता है क्योंकि इसमें शीतलन के द्रव-हाइड्रोजन के स्थान पर द्रव-नाइट्रोजन प्रयुक्त की जाती है जो द्रव-हाइड्रोजन की तुलना । बहुत सस्ती पड़ती है।

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अथवा

गैस के अणुओं का औसत मुक्त पथ क्या है? औसत मुक्त पथ के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए। यह ताप दाब पर किस प्रकार निर्भर करता है?

What is the mean free path of gaseous molecules? Establish the expression for the mean free path. How does it depend on temperature and pressure? 

अथवा

किसी गैस के अणुओं के औसत मुक्त पथ का क्या तात्पर्य है? इसके लिए व्यंजक का निर्गमन कीजिए। किसी अणु के औसत मुक्त पथ पर दाब तथा ताप के प्रभाव का वर्णन कीजिए। 

What is meant by the mean free path of the molecules of a gas? Derive an expression for it. Discuss how does it vary with the pressure and temperature of the gas.

उत्तर : औसत मुक्त पथ (Mean Free Path)-अणुगति सिद्धान्त के अनुसार किसी गैस के अणु सदैव तीव्र गति से सभी सम्भव दिशाओं में गति करते रहते हैं। अणुओं का छोटा परन्तु परिमित आकार होता है, अतः ये गति के दौरान एक-दूसरे से टकराते रहते हैं जिसके कारण इनकी चाल तथा दिशा दोनों बदलते रहते हैं। टक्करों के समय को छोड़कर अणु एक-दूसरे पर कोई आकर्षण बल नहीं लगाते हैं, अत: अणु दो टक्करों के बीच नियत चाल से सीधी रेखा में चलते हैं। किसी भी अणु का पथ अलग-अलग लम्बाइयों की टेढ़ी-मेढ़ी (zig-zag), सीधी रेखाआ का पथ होगा। दो उत्तरोत्तर टक्करों के मध्य अणु का पथ मुक्त पथ कहलाता है। विभिन्न मुक्त पर की लम्बाइयाँ विभिन्न होती हैं। एक लम्बे समय में अणु के सभी मुक्त पथों का औसत, अणु औसत मक्त पथ कहलाता है। इसे ‘2’ द्वारा व्यक्त करते हैं।

अत: औसत मुक्त पथ वह औसत पथ है, जो अण दो उत्तरोत्तर टक्करों के मध्य करता है। 

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 स्पष्टत: गैस के अणुओं का औसत मुक्त पथ गैस के दाब (p) के व्युत्क्रमानुपाती तथा परम ताप (T) के अनुक्रमानुपाती होता है।

औसत मुक्त पथ की संकल्पना अभिगमन घटनाओं (transport phenomena) जैसे श्यानता (viscosity), ऊष्मा-चालकता (thermal conductivity) तथा विसरण (diffusion) आदि के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण है।


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1 thought on “Explain the Principle Regenerative Cooling”

  1. यदि 0 • 004 किग्रा वायु को नियत आयतन पर 0°C से 2°C तक गरम किया जाए तो उसके आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए। वायु की नियत आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा 0. 172 किलोकैलोरी किग्रा-1 C-1है।

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