Explain The Basic Principle launching an Artificial Satellite Around the Earth

Explain The Basic Principle launching an Artificial Satellite Around the Earth

Explain The Basic Principle launching an Artificial Satellite Around the Earth:-Central forces, two particle central force problem, reduced mass, relative and centre of mass motion. Law of gravitation, Kepler’s laws. motions of planets and satellites, geo-stationary satellites.

 

खण्ड

 

प्रश्न 22.(क) पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा में कृत्रिम उपग्रह स्थापित करने का मूलभूत सिद्धान्त-समझाइए। यदि इसका वेग सीमान्त वेग से कम हो, तब क्या होता है

Explain the basic principle of launching an artificial satellite around the earth. What happens if the velocity is lower than critical velocity? 

(ख)समझाइए कि भू-स्थायी उपग्रह की कक्षा वृत्तीय तथा विषुवतीय तल में होती है। 

Explain that the orbit of a geo-stationary satellite is circular and equatorial. 

(ग) एक ग्रह की सूर्य से दूरी, पृथ्वी से सूर्य की दूरी से 4 गुना है। ग्रह का सूर्य के चारों ओर परिक्रमण काल ज्ञात कीजिए। 

The distance between sun and a planet is 4 times that of between sun and earth. Find the revolution time of planet around the sun.

 

उत्तर : (क) पृथ्वी की कक्षा में कृत्रिम उपग्रह स्थापित करना— चन्द्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। आजकल बहक्रम रॉकेटों द्वारा कृत्रिम उपग्रह स्थायी कक्षाओं में स्थापित किए जाते हैं। उपग्रह को रॉकेट में रखकर, पृथ्वी से छोड़ दिया जाता है। जब रॉकेट अधिकतम ऊँचाई h तक पहुँच जाता है, तब बिन्दु A (चित्र 30) एक विशेष युक्ति द्वारा उपग्रह को प्रणोद दिया जाता है जिससे इसमें क्षैतिज वेग v उत्पन्न हो जाता है। बिन्दु A पर उपग्रह की कुल ऊर्जा

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उपग्रह की कक्षा दीर्घवृत्त, जो एक बन्द पथ है, परवलयाकार अथवा अतिपरवलयाकार हो सकती है जो इस बात पर निर्भर करती है कि ऊर्जा E ऋणात्मक है (E < 0), शून्य है (E = 0) अथवा धनात्मक है (E > O)। यदि ऊर्जा E का मान बहुत अल्प है तब दीर्घ-वृत्ताकार कक्षा पृथ्वी से टकरा जाती है तथा. उपग्रह वापस पृथ्वी पर गिर जाता है।

 

यदि किसी पिण्ड को पृथ्वी की त्रिज्या के सापेक्ष काफी कम ऊँचाई पर भेजकर 8. किमी/सेकण्ड का क्षैतिज वेग दे दें तो यह पृथ्वी के गुरुत्व के अन्तर्गत वृत्तीय पथ पर चलने लगेगा। अत: उपग्रह को ऊँचाई h(<< R) तक भेजकर, 8 किमी/सेकण्ड का क्षैतिज वेग देने पर वह पृथ्वी के चारों ओर वृत्तीय कक्षा में स्थापित हो जाएगा। यदि वेग 8 किमी/सेकण्ड से कम होगा तो उपग्रह पृथ्वी के समीप आने लगेगा तथा अन्त में पृथ्वी से टकरा जाएगा। इस प्रकार 8 किमी/सेकण्ड का वेग, उपग्रह के लिए सीसान्त (निम्नतम) वेगं है।

 

(ख) यदि किसी कृत्रिम उपग्रह की वृत्तीय कक्षा पृथ्वी के विषुवतीय तल में पृथ्वी से इतनी ऊँचाई पर हो कि उपग्रह का परिक्रमण काल ठीक पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः परिक्रमण काल (24 घण्टे) के बराबर हो तो वह उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर रहेगा। इस प्रकार के उपग्रह को ‘भू-स्थायी’ अथवा ‘तुल्यकाली उपग्रह’ कहते हैं।

(ग) केपलरं के तृतीय नियम से,

 

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