Describe Lummer Pringsheim Experiment

Describe Lummer Pringsheim Experiment

 

Describe Lummer Pringsheim Experiment:-Black Body Radiation: Pure temperature dependence, Stefan Boltzmann law, pressure of radiation. Spectral distribution of black body radiation, Wein displacement law, Rayleigh-Jean’s law, Planck’s law, the ultraviolet catastrophy.

खण्ड ‘इ’

प्रश्न 29. कृष्णिका स्पेक्ट्रम के अध्ययन के लिए ल्यूमर-प्रिंग्जहाइम प्रयोग का वर्णन कीजिए। कृष्णिका विकिरण के लिए प्लांक का नियम प्राप्त कीजिए तथा दर्शाइए कि वीन का नियम व रैले-जीन्स का नियम प्लांक के नियम की विशेष स्थितियाँ हैं। 

Describe Lummer-Pringsheim experiment for the study of black body radiation spectrum. Deduce the Planck’s law of black body radiation and show that Wien’s law and Rayleigh-Jean’s law are the special cases of Planck’s law. 

अथवा

विकिरण के उत्सर्जन एवं अवशोषण के सम्बन्ध में प्लांक की क्वाण्टम परिकल्पना समझाइए। प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए तथा इससे प्लांक के विकिरण सूत्र को निगमित कीजिए। 

 

Explain Planck’s quantum hypothesis of emission and absorption of radiation. Deduce an expression for the average energy of a Planck’s oscillator and hence obtain Planck’s radiation formula. 

 

उत्तर : ल्यूमर तथा प्रिंग्जहाइम ने कृष्णिका को अनेक तापों तक गर्म किया तथा प्रत्येक ताप के लिए विभिन्न तरंगदैर्यों के विकिरणों की तीव्रताओं तथा तरंगदैर्घ्य में ग्राफ खींचे। इन्हें वितरण वक (distribution curve) कहते हैं। विभिन्न विकिरणों की तीव्रताओं तथा तरंगदैर्यों के मध्य ग्राफ चित्र-23 में दिखाए गए हैं। सभी तापों पर इन वक्रों की सामान्य आकृति एक जैसी है। ये वक्र कृष्णिका विकिरण के लक्ष्यों के सम्बन्ध में अग्रलिखित सूचनाएँ देते हैं

 

(i) दिए हुए ताप पर कृष्णिका द्वारा उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा में एक विशेष तरंगदैर्घ्य की ऊर्जा सर्वाधिक होती है।

(ii) ताप और उस तरंगदैर्घ्य, जिस पर E का मान सर्वाधिक होता है, का गुणनफल नियत रहता है अर्थात् mT = नियतांक।

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इस नियम को वीन का विस्थापन नियम कहते हैं। इससे स्पष्ट है कि कम ताप पर अधिक तरंगदैर्घ्य का विकिरण उत्सर्जित होता है। जैसे-जैसे ताप बढ़ाया जाता है, छोटी तरंगदैर्घ्य के विकिरण की मात्रा बढ़ने लगती है। इसी कारण लोहे की गेंद गर्म करने से पहले हल्की लाल, फिर पीली और अन्त में सफेद हो जाती है।

 

(iii) ताप बढ़ने पर वक्र का क्षेत्रफल बढ़ता जाता है अर्थात् उसकी विकिरण ऊर्जा में

वृद्धि होती है, जो नापने पर संगत परम तापों के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती पायी जाती है। इस प्रकार ये वक्र स्टीफन के नियम की पुष्टि भी करते हैं।

अर्थात्                                        E = pieT4

 

जहाँ ० स्टीफन-बोल्ट्समान नियतांक है।

विभिन्न तरंगदैर्घ्य में ऊर्जा वितरण के सम्बन्ध में समय-समय पर विभिन्न नियम दिए गए- ..

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जहाँ C1 व C2 नियतांक हैं। यह सूत्र केवल छोटी तरंगदैर्यों पर ही प्रायोगिक परिणामों की पुष्टि करता है तथा बड़ी तरंगदैर्यों पर विचलित हो जाता है।

 

(ii) रैले-जीन्स का नियम (Rayleigh-Jean’s Law)-इन वैज्ञानिकों ने यह माना कि गुहिका (cavity) के अन्दर विकिरण विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के रूप में हैं

 

 

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यह सूत्र केवल बड़ी तरंगदैर्यों पर ही प्रायोगिक परिणामों की पुष्टि करता है। इस सूत्र के अनसार जैसे-जैसे छोटी तरंगदैर्यों की ओर जाएँगे. उत्सर्जित ऊर्जा अत्यधिक तेजा स बढ़ा। प्रयोग इस परिणाम की पुष्टि नहीं करते।

 

(iii) प्लांक का नियम (Planck’s Law)-कृष्णिका विकिरण के स्पेक्ट्रमी वितरण को समझाने के लिए सन् 1900 ई० में जर्मनी के वैज्ञानिक मैक्स प्लांक ने एक क्रान्तिकारी विचार रखा, जिसे प्लांक की क्वाण्टम परिकल्पना कहते हैं।

 

इस परिकल्पना के अनुसार किसी पदार्थ द्वारा ऊर्जा का उत्सर्जन अथवा अवशोषण सतत रूप से न होकर ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों में होता है, जिन्हें हम फोटॉन ऊर्जा क्वाण्टा कहते हैं। प्रत्येक तरंगदैर्घ्य 2 तथा आवृत्ति v( = c/h) का अपना एक अलग फोटॉन होता है, जिसकी ऊर्जा की मात्रा (E) का मान उसकी आवृत्ति के समानुपाती होता है, अर्थात् E = y अथवा E = hy, जहाँ नियतांक है जिसे प्लांक नियतांक कहते हैं।

 

प्लांक ने यह बताया कि किसी वस्तु द्वारा ऊष्मा का उत्सर्जन अथवा अवशोषण इन फोटॉन ऊर्जा के पूर्णरूप में होता है अर्थात् कोई वस्तु hy, 2 hy, 3 hv,….. आदि के रूप में ऊर्जा का अवशोषण अथवा उत्सर्जन करेगी।

 

प्लांक ने यह माना कि कृष्णिका की दीवारों के अणु दोलित्रों की तरह व्यवहार करते हैं तथा प्रत्येक दोलित्र की अपनी अभिलक्षणिक आवृत्ति होती है। ये दोलित्र गुहिका में विद्यत-चम्बकीय ऊर्जा का उत्सर्जन एवं अवशोषण करते रहते हैं और इस प्रकार साम्यावस्था बनाए रखते हैं।

 

प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा (Average Energy of Planeta Oscillators)-मैक्सवेल के अनुसार किसी दोलित्र की ऊर्जा ६ होने की प्रायिकता (probability) e-elkT होती है, जहाँ k बोल्ट्स मान T नियतांक है तथा T परम ताप है। माना कि गहिका में No, N1, N2,……,Nr,…. उन दोलित्रों की संख्याएँ हैं जिनकी ऊर्जा क्रमश: 0, 2, re,….., re,……. हैं। तब re ऊर्जा वाले दोलित्रों की संख्या

N= N0e –re/kt

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प्लांक का विकिरण सूत्र (Planck’s Radiation Formula)— आवृत्ति v एवं v + dv के बीच विकिरण ऊर्जा का घनत्व uv तथा v आवृत्ति का विकिरण उत्सर्जित करने वाले दोलित्र की औसत ऊर्जा का निम्नलिखित सम्बन्ध होता है-

 

जहाँ e ऊर्जा क्वाण्टम है, जिसको दोलित्र उत्सर्जित या अवशोषित करता है। प्लांक ने e = hy रखा, जहाँ v दोलित्र द्वारा उत्सर्जित अथवा अवशोषित विकिरण की आवृत्ति तथा h प्लांक नियतांक है।

 

समीकरण (6) ही । के पदों में प्लांक का विकिरण सूत्र है। इसे तरंगदैये 2 क पदा म लिखने के लिए,

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यह प्लांक का तरंगदैर्घ्य के पदों में विकिरण सूत्र है तथा सम्पूर्ण तरंगदैर्घ्य परिसर में प्रायोगिक परिणामों की पुष्टि करता है।

 

वीन तथा रैले-जीन्स के नियमों को प्लांक के नियम से प्राप्त किया जा सकता है।


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