BSc Zoology Digestive System Question Answer Notes

BSc Zoology Digestive System Question Answer Notes

 

BSc Zoology Digestive System Question Answer Notes :- In this post all the questions of the second part of zoology are fully answered. This post will provide immense help to all the students of BSc zoology. All Topic of zoology is discussed in detail in this post.

 


 

प्रश्न 6 – प्रॉन अथवा पैलीमोन (Palaemon) के पाचन अंगों एवं अशन विधि | का वर्णन कीजिए। प्रॉन में हिपैटोपैन्क्रियास का कार्य समझाइए। 

Describe the digestive system and feeding mechanism of Prawn or Palaemon. Describe the mechanism of function of hepatopancreas in Prawn. 

पैलीमोन में हैस्टेट प्लेट पर टिप्पणी लिखिए।

Write short note on Hastate plate in Palaemon.

उत्तर –

पाचन तन्त्र 

(Digestive System)

आहार नाल (Alimentary canal) Notes

आहार नाल में निम्नलिखित भाग होते हैं

अग्र आहार नाल (Pre alimentary canal)-(मुख, मुख-गुहिका, ग्रसिका और आमाशय), मध्य आहार नाल और पश्च आहार नाल।

अग्र और पश्च आहार नाल आन्तरक (intima) नामक क्यूटिकल से आस्तरित रहती है।

मुख तथा मुख गुहिका (Mouth and Buccal cavity)-मुख सिर के अग्र सिरे पर मध्य-अधर तल पर होता है। इसमें सामने की ओर लैब्रम, दाएँ-बाएँ पार्श्व में मैंडिबल्स के कृन्तक (incisor) प्रवर्ध और पीछे की ओर लैबियम होता है। मुख एक छोटी मुख गुहिका में खुलता है। इसमें भोजन को चबाने के लिए मैंडिबल्स के चर्वणक (molar) प्रवर्ध होते हैं। मुख गुहिका पीछे पृष्ठ में ग्रसिका (oesophagus) में खुलती है। ग्रसिका सीधे ऊपर की ओर आमाशय के फर्श में खुलती है।

BSc Digestive System Notes
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आमाशय (Stomach)—यह शिरोवक्ष (cephalothorax) में फैला होता है। यह पार्यों में तथा अधर और पश्च तलों में हिपैटोपैन्क्रियास नामक ग्रन्थि से घिरा रहता है। झींगे का आमाशय पतली भित्ति और दो कोष्ठों का होता है –

(i) बड़ा अग्र कार्डियक आमाशय

(ii) छोटा पश्च पाइलोरिक आमाशय

(i) कार्डियक आमाशय (Cardiac stomach)-इसके आन्तरिक क्यूटिकली आस्तर (intima) में असंख्य, अस्पष्ट, अनुदैर्घ्य वलन होते हैं जो छोटे-छोटे शूकों से ढके रहते हैं। ग्रसिका छिद्र की अगली भित्ति में एक क्यूटिकली वृत्तीय पट्टिका (circular plate) और इसके पीछे आमाशय की छत पर एक क्यूटिकली मालाकार पट्टिका (lanceolate plate) होती है। कार्डियक आमाशय के फर्श के मध्य में एक त्रिभुजाकार प्लेट होती है जिसे

BSc Digestive System Notes
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भालाकार प्लेट या हैस्टेट प्लेट (hastate plate) कहते हैं। भालाकार प्लेट की ऊपरी सतह पर कोमल शूक और एक स्पष्ट मध्यस्थ कटक (median ridge) होता है। इस प्लेट का पिछला त्रिभुजाकार अवनमित भाग कार्डियो-पाइलोरिक छिद्र की अगली सीमा बनाता है। भालाकार प्लेट की प्रत्येक पार्श्व भुजा के नीचे एक अनुदैर्घ्य क्यूटिकली आधारी छड़ (supporting rod) होती है। भालाकार प्लेट की दोनों पार्वीय सीमाओं साथ सँकरी पार्श्व खाँच (lateral groove) होती है जिसके फर्श पर खुले ड्रेन पाइप के समान एक क्यूटिकल प्लेट या खाँच प्लेट (grooved plate) होती है। आधारी छंड़ द्वारा अन्दर की सीमा और एक लम्बी क्यूटिकली कटक पट्टिका (ridged plate) प्रत्येक पार्श्व खाँच की बाहरी सीमा बनाती है। कटक प्लेट की अन्दर की सीमा पर पूरी लम्बाई में कोमल शूकों की एक पंक्ति होती है जो एक कंघी के समान रचना बनाती है। इसी कारण कटक प्लेट को comb plate (कंकत प्लेट) भी कहते हैं। कंकत प्लेट के शूक पार्श्व खाँच को पार करके आंशिक रूप से भालाकार प्लेट के पाीय किनारे के ऊपर चढ़ जाते हैं। दोनों कंकत प्लेट आगे की ओर परस्पर जुड़कर भालाकार प्लेट को पूरा घेर लेती हैं। लेकिन इनके अन्दर की ओर मुड़े पिछले सिरे जठरागम-निर्गम द्वार (cardiopyloric aperture) द्वारा अलग रहते हैं। कंकत प्लेटों के बाहर दोनों ओर आमाशय की पार्श्व भित्ति में एक पार्श्व अनुदैर्घ्य वलन बन जाता है। दाएँ व बाएँ दोनों वलन आगे की ओर छोटे होते जाते हैं परन्तु पीछे की ओर धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं और पिछले भाग में कार्डियो-पाइलोरिक छिद्र की पार्श्व भुजाएँ बनाने के लिए ये अन्दर की ओर मुड़ जाते हैं। इन वलनों को निर्देशक कटक (guiding ridges) भी कहते हैं क्योंकि ये भोजन को कार्डियो-पाइलोरिक छिद्र की ओर भेजते हैं।

कार्डियो-पाइलोरिक छिद्र 4 कपाटों द्वारा सुरक्षित रहता है। यह छिद्र पाइलोरिक आमाशय में खुलता है।

(ii) पाइलोरिक आमाशय (Pyloric stomach)–यह एक छोटा एवं सँकरा कोष्ठ कार्डियक आमाशय के पिछले सिरे के नीचे स्थित होता है। इसकी पार्श्व भित्तियाँ अन्दर की ओर को वलित हो जाती हैं जिसे आमाशय की गुहिका एक बड़े अधर कोष्ठ और ऊपर का छोटा पृष्ठ कोष्ठ में विभक्त हो जाती है। अधर कोष्ठ का फर्श मध्य में उठकर एक अधर मध्यवर्ती अनुदैर्घ्य कटक बनाता है, जिससे यह दो पावीय कक्षों में विभक्त हो जाता है। इसका फर्श एक फिल्टर प्लेट द्वारा आच्छादित रहता है। क्रॉस सेक्शन में फिल्टर प्लेट उल्टे ‘V’ अक्षर की भाँति दिखाई देती है। फिल्टर प्लेट की प्रत्येक भुजा की सतह पर अनुदैर्घ्य कटकों और खाँचों की एकान्तरित श्रेणी होती है। कटकों पर शूकों की पंक्तियाँ होती हैं जो खाँचों के ऊपर एक नमदे के समान रचना बनाती हैं। अधर कोष्ठ की दायीं व बायीं भित्तियों पर भी सघन शूक होते हैं तो फिल्टर प्लेट के साथ मिलकर एक चलनी या छन्ने का निर्माण करते हैं। यह पाइलोरिक फिल्टर उपकरण केवल तरल भोजन को ही अपने में से होकर जाने देता है।

हिपैटोपैन्क्रियाटिक वाहिनियों के युग्मित छिद्र फिल्टर उपकरण के पीछे पाइलोरिक आमाशय के पृष्ट कोठ एवं मध्य आहार नाल के संगम के नीचे खुलते हैं।

पृष्ट कोष्ठ से ऊपर की ओर एक छोटी अन्धनाल (caecum) निकलती है और फिर पीछे की ओर मध्य आहार नाल में खुलती है।

मध्य आहार ना (Midgut)-यह एक लम्बी सँकरी सीधी नली है और छठे उदरखण्ड तक फैली होती है।

पश्च आहार नाल (Hindgut)—यह मध्य आहार नाल से गुदा तक फैली नाल है। सके अग्र फले भाग को मलाशय (rectum) कहते हैं और पश्च सँकरा, नली आकार भाग गदा द्वारा बाहर खुलता है। गुदा पर अवरोधनी होती है और यह पुच्छ खण्ड के आधार पर एक उभरे पैपिला पर स्थित होता है।

हिपैटोपैन्क्रियास 

(Hepatopancreas) Notes

यह बड़ा, द्विपालित, सघन तथा नारंगी ग्रन्थिल पुंज है। यह जनन ग्रन्थि के नीचे सिफैलोथोरैक्स में आमाशय के पार्श्व-अधर और पश्च तलों को घेरे रहता है। यह शाखादार असंख्य नलिकाओं का बना होता है जो संयोजी ऊतक द्वारा परस्पर बँधी रहती हैं। इन नलिकाओं की भित्ति ग्रन्थिल कोशिकाओं, फर्मेन्ट कोशिकाओं, वसा की गोलिकाओं से युक्त यकृत कोशिकाओं और आधारी कोशिकाओं से बनी स्तम्भी उपकला की बनी होती हैं। उपकला एक आधार कला पर स्थापित रहती है। ये नलिकाएँ बार-बार जुड़कर दो बड़ी हिपैटोपैन्क्रियाटिक वाहिनियाँ बनाती हैं जो पाइलोरिक फिल्टर के ठीक पीछे पाइलोरिक आमाशय के अधर कोष्ठ में खुल जाती हैं।

कार्य (Functions)-हिपैटोपैन्क्रियास उच्च श्रेणी के जन्तुओं के पैन्क्रियास, क्षदांत्र और यकृत का कार्य संयुक्त रूप से करता है। अग्न्याशय की भाँति यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के लिए पाचक एन्जाइम स्रावित करता है। यह पचे हुए भोजन का अवशोषणा करता है और यकृत की भाँति यह ग्लाइकोजन, वसा तथा कैल्सियंम का संग्रह करता है।

भोजन (Food) – इसके मुख्य भोजन शैवाल, मॉस तथा अन्य जलवासी पौधे, कीट, घोंघे, भेकशिश, मछलियाँ आदि हैं। यह अपना भोजन रात्रि में लेता है।

यह तीसरे मैक्सिलीपीड की सहायता से कीलाभ टांगों द्वारा भोजन को पकड़कर मुख में पहुंचाता है। दसरे मैक्सिलीपीड के कोक्सा से भोजन को पकड़ता है और मैंडिबल्स के कृन्तक (incisor) प्रवर्धों से उसके छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। ये छोटे टुकड़े मैक्सिलीपीड, मिला और मैक्सिक्यूली की सहायता से निगल लिए जाते हैं। मुख गुहिका के अन्दर मैंडिबल्स के मोलर प्रवर्ध भोजन को पीस देते हैं। फिर उसे ग्रसिका द्वारा कार्डियक आमाशय में पहुँचाया जाता है।

 


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