BSc Physics Equation of State Notes

BSc Physics Equation of State Notes

BSc Physics Equation of State Notes:-Real Gas: vander Waal’s gas, equation of state, nature of vander Waal’s forces, comparison with experimental P-V curves. The critical constants, gas and vapour, Joule expansion of ideal gas and of a vander Waal’s gas, Joule coefficient, estimates of J-T cooling.Ideal Gas: Kinetic model, deduction of Boyle’s law, interpretation of temperature, estimation of rms speeds of molecules. Brownian motion estimate of the Avogadro number. Equipartition of energy, specific heat of monoatomic gas, extension to di- and tri-atomic gases, behaviour at low temperatures. Adiabatic expansion of an ideal gas, applications to atmospheric physics. 

 

प्रश्न 31. कार्नो का आदर्श ऊष्मा इंजन क्या है? उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में अन्तर बताइए।

उत्तर : कार्नो का आदर्श ऊष्मा इंजनकानों ने वास्तविक ऊष्मा इंजन के सभी दोषों से मुक्त एक आदर्श ऊष्मा इंजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस इंजन की सैद्धान्तिक महत्ता यह है कि इसको मानक मानकर वास्तविक ऊष्मा इंजनों के कार्यों की जाँच की जा सकती है। जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है, कानों इंजन में चार मुख्य भाग हैं

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(1) ‘पूर्णत: ऊष्मा-रोधी’ दीवारों तथा पूर्णतः चालक पैंदी वाला सिलिण्डर जिसमें ‘पूर्णत: ऊष्मा-रोधी’ तथा ‘घर्षणरहित’ पिस्टन कस कर फिट है। इस सिलिण्डर में किसी गैस (कार्यकारी पदार्थ) का एक निश्चित द्रव्यमान लिया गया है तथा इसके पिस्टन पर कुछ बाट (भार) रखे गए हैं।

(2) अनन्त ऊष्मा-धारिता’ तथा एक नियत ताप T वाला तप्त पिण्ड (Hot Body) जो कि ‘स्रोत (source)’ का कार्य करता है।

(3) ‘अनन्त ऊष्मा-धारिता’ तथा एक नियत ताप T2 (<T1) वाला शीतल पिण्ड (Cold Body) जो कि ‘सिंक’ (Sink) का कार्य करता है।

(4) एक ‘पूर्णत: ऊष्मा-रोधी’ स्टैंड (Perfect Heat-Insulating Stand)।

 

उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में अन्तर

(1) उत्क्रमणीय प्रक्रम उस प्रक्रम को कहते हैं जिसे बाह्य दशाओं में अल्प परिवर्तन करके, उत्क्रमित (reverse) करने पर सीधे प्रक्रम में हुए सभी परिवर्तनों की विपरीत दिशा में ठीक-ठीक पुनरावृत्ति हो जाए तथा प्रक्रम में भाग लेने वाली सभी वस्तुओं व बाह्य प्रतिवेश में कोई परिवर्तन शेष न रहे।

(2) वह प्रक्रम जिसे बिल्कुल ठीक-ठीक उत्क्रमित नहीं किया जा सकता, अनुत्क्रमणीय प्रक्रम कहलाता है।

 

प्रश्न 32. ऊष्मागतिक साम्य से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : ऊष्मागतिक साम्यं (Thermodynamic Equilibrium)-जब निकाय  और उसके प्रतिवेश (surroundings) के बीच कोई असन्तलित बल न हो तब वह निकाय यान्त्रिक साम्य (mechanical equilibrium) में कहा जाता है। यदि निकाय में उसकी आन्तरिक संरचना में परिवर्तन की कोई प्रवृत्ति नहीं है तथा निकाय के एक भाग से दूसरे को पदार्थ के स्थानान्तरण की भी कोई प्रवृत्ति नहीं है तब निकाय रासायनिक साम्य (chemical equilibrium) में कहा जाता है। पुन: यदि निकाय के सभी भाग एक ही ताप पर हों जो प्रतिवेश के ताप के बराबर है तब निकाय को तापीय साम्य (thermal equilibrium) में कहा जाता है। जब कोई निकाय तीनों प्रकार के साम्य में होता है तो उसे ऊष्मागतिक साम्य में कहा जाता है। इस दशा में निकाय अथवा प्रतिवेश की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता।

यदि तीनों प्रकार के साम्यों में से किसी एक साम्य की भी शर्त पूरी नहीं है तो निकाय को असाम्य-अवस्था (non-equilibrium state) में कहा जाता है। इस दशा में निकाय में त्वरणं, भँवर (eddies), रासायनिक क्रिया तथा निकाय व प्रतिवेश के बीच ऊष्मा-स्थानान्तरण  जैसी घटनाएँ होती हैं।

 

प्रश्न 33. ऊष्मागतिक निकाय क्या है

उत्तर : वह निकाय ‘ऊष्मागतिक’ निकाय है जो प्रतिवेश से कम-से-कम दो विभिन्न प्रकारों से क्रिया कर सके तथा इनमें से एक में ऊष्मा का स्थानान्तरण अनिवार्य हो। दूसरे में ऊर्जा स्थानान्तरण की कोई भी अन्य विधि हो सकती है, जैसे कि निकाय पर या निकाय द्वारा यान्त्रिक कार्य अथवा विद्युतचुम्बकीय पारस्परिक क्रिया (जैसे-चुम्बकन)। सिलिण्डर में भरी गैस, द्रव के सम्पर्क में उसकी वाष्प, तना हुआ तार, चुम्बकीय पदार्थ का एक टुकड़ा, ऊष्मागतिक निकाय के उदाहरण हैं। .

 

प्रश्न 34. ऊष्मागतिकी का शून्य नियम लिखिए। 

उत्तर : ऊष्मागतिकी के शून्य नियम के अनुसार, यदि दो निकाय A व Bअलग-अलग किसी तीसरे निकाय C के साथ तापीय साम्यावस्था में हैं, तब A व B एक दूसरे के साथ भी तापीय साम्यावस्था में होंगे।

प्रश्न 35. उत्क्रमणीयता की शर्ते बताइए। 

उत्तर : उत्क्रमणीयता की शर्ते (Conditions of Reversibility)-कोई भी प्रक्रम तभी उत्क्रमणीय हो सकता है जब वह निम्नलिखित दो शर्तों को पूरा करता है ।

(1) क्षयकारी बल जैसे घर्षण, श्यानता, विद्युत प्रतिरोध, चुम्बकीय शैथिल्य आदि पूर्णतया अनुपस्थित होने चाहिए।

(2) प्रक्रम की किसी भी अवस्था में निकाय के ताप व दाब कभी भी बाह्य वातावरण से. अधिक भिन्न नहीं होने चाहिए, अर्थात् प्रक्रम तथा बाह्य वातावरण के बीच यान्त्रिक, ऊष्मीय एवं रासायनिक साम्य बना रहना चाहिए।

 

प्रश्न 36. एक गैस के अणुओं का किसी दाब Pऔर ताप T पर औसत मुक्त पथ 2 है। यदि ताप नियत रहे और दाब दोगुना हो जाए, तो औसत मुक्त पथ में क्या बदलाव आएगा?

उत्तर : परम ताप T तथा दाब P पर गैस अणुओं का औसत मुक्त पथ .

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प्रश्न 37. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम लिखिए। 

उत्तर : सभी ऊष्मागतिकी प्रक्रमों में निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा, निकाय द्वारा किए गए कार्य व इसकी आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होती है।

प्रश्न 38. एक निकाय 1000 कैलोरी ऊष्मा अवशोषित करता है तथा 1675 जूल बाह्य कार्य करता है। निकाय की आन्तरिक ऊर्जा 2505 जूल बढ़ जाती है। Jका मान ज्ञात कीजिए। 

हल : ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,

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प्रश्न 39. आदर्श गैसों के लिए मेयर का सम्बन्ध Cp – Cv = R सिद्ध कीजिए। 

उत्तर : मेयर के सम्बन्ध Cp-Cv = R को सिद्ध करनामाना 1 ग्राम-अणु आदर्श गैस का परम ताप T तथा दाब p पर आयतन V है। माना गैस की स्थिर दाब पर आण्विक विशिष्ट ऊष्मा Cp है तथा स्थिर आयतन पर Cv है। माना गैस को स्थिर आयतन पर ताप T से T + dT तक गर्म किया जाता है तब आवश्यक ऊष्मा dQ का मान CVdT के बराबर होगा। चूँकि आयतन स्थिर रहता है, अतः कोई बाह्य कार्य नहीं होगा (dw = 0) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियमानुसार,

dQ = dU + d

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प्रश्न 40. यदि 0 • 004 किग्रा वायु को नियत आयतन पर 0°C से 2°C तक गरम किया जाए तो उसके आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए। वायु की नियत आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा 0. 172 किलोकैलोरी किग्रा-1 C-1है।

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