Zoology Adaptations Question Answer

Zoology Adaptations Question Answer

 

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प्रश्न – 5 हैल्मिन्थस की परजीवी अनुकूलताओं तथा उनके आर्थिक मदन का वर्णन कीजिए।

Describe the parasitic adaptations and economic importance of helminthes. 

उत्तर

अनुकूलन

(Adaptations) 

प्रत्येक जीव में स्वयं को अपने चारों ओर के वातावरण के अनुकूल ढालने की क्षमता पायी जाती है। इस क्षमता को अनुकूलन कहते हैं। प्रत्येक जीव तथा उसके विभिन्न अंगों में अपने विशेष वातावरण के अनुरूप परिवर्तित होने की आश्चर्यजनक क्षमता पायी जाती है। ये अनुकूलताएँ जीव की रचना, कार्यिकी, व्यवहार तथा स्वभाव सभी से सम्बन्धित होती हैं।

Zoology Adaptations Question Answer
Zoology Adaptations Question Answer

फैसिओला तथा टीनिया अन्त:परजीवी चपटे कृमि हैं तथा परजीवी स्वभाव के अनुरूप इनकी रचना तथा कार्यिकी में विशेष परिवर्तन पाए जाते हैं जो कि निम्नलिखित हैं –

परजीवी अनुकूलताएँ (Parasitic Adaptations) 

परजीवी अनुकूलताएँ किसी परजीवी की रचना एवं जीवन-इतिहास में पाए जाने वाले वे मुख्य परिवर्तन हैं जिसकी सहायता से वह सरलतापूर्वक परजीवी जीवन व्यतीत कर सके तथा परजीवी पोषद के शरीर के भीतर सफलतापूर्वक रह सके क्योंकि फैसिओला एवं टीनिया अन्तःपरजीवी हैं अत: इनमें उस वातावरण के अनुकूलन के लिए निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैंI

(I) आकारिक परिवर्तन या विशेषताएँ

(Morphological changes or features)

ये निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं

  1. आकारिक अनुकूलन (Morphological adaptations)-ये तीन प्रकार के होते हैं-(i) शरीर पृष्ठ-अधर दिशा में चपटा, पत्ती के समान तथा लगभग त्रिकोणाकार होता है जिससे चोट लगने का भय कम हो जाता है। टीनिया फीते के आकार का चपटा कृमि है।

(ii) चिपकने के लिए दो चूषकों (Suckers) के रूप में विशेष अंग पाए जाते हैं जा अत्यन्त पेशीयुक्त होते हैं। टीनिया में शीर्ष (scolex) पर चार चूषक होते हैं। ___

(iii) बाह्य आकृति अत्यन्त सरल होती है। शरीर को सिर, धड़ तथा पूँछ में नहीं बाटा जा सकता है। उपांगों का भी अभाव होता है।

  1. आन्तरिक रचनात्मक अनुकूलन (Anatomical adaptations)-ये नौ प्रकार के होेते हैं।

(i) प्रौढ़ अवस्था में शरीर पर पक्ष्म (सीलिया) नहीं होते, परन्तु क्यूटिकल का

मोटा स्तर पाया जाता है जिससे इसके शरीर पर पोषद के रासायनिक पदार्थों का प्रभाव न हो सके। शरीर पर कण्टिकाएँ भी पायी जाती हैं।

(ii) फैसिओला में मुख के पास तथा अधर-तल पर क्यूटिकल मोटी होकर दो चूषक – बना लेती है। क्यूटिकल पर पाचक रसों का कोई प्रभाव नहीं होता।

(iii) चलन अंग नहीं पाए जाते क्योंकि प्रौढ़ जन्तु को पोषद के शरीर में घूमने की आवश्यकता नहीं होती, किन्तु स्वतन्त्रजीवी लारवा में पक्ष्म होते हैं।

(iv) पाचन-तन्त्र अपूर्ण होता है। मुख शरीर के अगले सिरे पर स्थित होता है और चूषक द्वारा घिरा रहता है। ग्रसनी अत्यन्त पेशीयुक्त तथा शोषक (suctorial) होती है। टीनिया में इसका अभाव होता है।

आंत्र अत्यधिक शाखान्वित होती है जिससे शरीर के विभिन्न भागों को पचा हुआ भोजन पहुँचाया जा सके। यह परिवहन तन्त्र की अनुपस्थिति को पूर्ण करती है। टीनिया में आहार नाल नहीं होती। यह पचा भोजन पोषद की आंत्र से लेता है।

(v) परजीवी होने के कारण इसे पचा हुआ भोजन प्राप्त होता है। अत: गुदाद्वार (anus) नहीं होता।

(vi) परिवहन तन्त्र तथा श्वसन अंग अनुपस्थित होते हैं। इनमें अनॉक्सी श्वसन पाया जाता है। यह आन्तर-जैविक अस्तित्व के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पोषद के शरीर में स्वतन्त्र ऑक्सीजन का मिलना अत्यन्त कठिन है।

(vii) परिवहन तन्त्र की कमी को पूर्ण करने के लिए उत्सर्जन अंग बहुत विकसित होते हैं। उत्सर्जन वाहिनियाँ अत्यधिक शाखान्वित होती हैं और इनके अन्तिम सिरों पर शिखा __कोशिकाएँ होती हैं। टीनिया में उत्सर्जन तन्त्र जल की मात्रा का नियन्त्रण करता है।

(viii) तन्त्रिका तन्त्र अल्प विकसित होता है तथा संवेदी अंग का पूर्ण अभाव होता है क्योंकि पोषक के शरीर के भीतर विशेष वायुमण्डलीय परिवर्तन नहीं होते।

(ix) जनन अंग अत्यधिक विकसित होते हैं। अत्यधिक शाखान्वित अण्डाशय तथा वषणों से असंख्य युग्मक बनते हैं। टीनिया में प्रत्येक प्रोग्लोटिड एक जन्तु को प्रदर्शित करता है। प्रत्येक खण्ड में नर व मादा जनन अंग पाए जाते हैं।

(II) जीवन-इतिहास में परिवर्तन

(Changes in Life-history) …

ये परिवर्तन पाँच प्रकार के होते हैं

  1. बहुत अधिक संख्या में अण्डों का उत्पादन करना (लगभग दस लाख) जिससे प्रकीर्णन का भय समाप्त हो जाता है।
  2. अण्डों के ऊपर रक्षात्मक खोल होता है जिसमें ऑपरकुलम होता है।
  3. जाति के वितरण के लिए इनके जीवन-इतिहास में द्वितीयक पोषद पाया जाता है।
  4. लारवा अवस्था में पीडोजेनेसिस द्वारा वर्धन होता है।
  5. मिरासिडियम स्वतन्त्रतापूर्वक तैरने वाला रोमयुक्त लारवा है, क्योंकि इसे नये पोल को खोजना होता है। सरकेरिया लारवा द्वितीयक पोषद के शरीर से निकलकर परिकोष्ठित हो जाता है जिससे बाह्य परिवर्तनों का परजीवी पर प्रभाव न हो सके।

Zoology Adaptations Question Answer

टीनिया में अत्यधिक जनन क्षमता होती है। प्रत्येक प्रौढ़ प्रोग्लोटिड में 30 से 40 हजार अण्डे बनते हैं। नये पोषद तक पहुँचने में आने वाली जोखिमों से परजीवी के नष्ट होने के भय को दूर करने के लिए एक जन्तु से उत्पन्न सन्तानों की संख्या बहुत अधिक होती है जिसमें से कुछ तो अवश्य ही नये पोषद को खोज सकते हैं तथा जाति की वृद्धि कर सकते हैं।


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