What is Boyle temperature Physics

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What is Boyle temperature Physics:-The Laws of Thermodynamics: The Zeroth law, various indicator diagrams, work done by and on the system, first law of thermodynamics. internal energy as a state function and other applications. Reversible and irreversible changes. Carnot cycle and its efficiency, Carnot theorem and the second law of thermodynamics. Different versions of the second law, practical cycles used in internal combustion engines. Entropy, principle of increase of entropy. The thermodynamic scale of temperature, its identity with the perfect gas scale. Impossibility of attaining the absolute zero, third law of thermodynamics.

 

प्रश्न 4. वान डर वाल्स अवस्था समीकरण व्युत्पन्न कीजिए तथा किसी गैस के कान्तिक नियतांकों को वान डर वाल्स समीकरण के नियतांकों ‘a’ व ‘b’ के पदों में व्यक्त कीजिए। a तथा b को क्रान्तिक नियतांकों के पदों में भी व्यक्त कीजिए। 

Derive van der Waals equation of state and deduce expressions for the critical constants of a gas in terms of the constants ‘a’ and ‘B of the vander Waal’s equation. Also calculate ‘a’ and ‘b’ in terms of critical constants.

अथवा

वान डर वाल्स अवस्था समीकरण व्युत्पन्न कीजिए तथा सैद्धान्तिक वक्रों की तुलना एन्ड्रज के प्रयोगात्मक वक्रों से कीजिए। 

Deduce van der Waal’s equation of state and compare its theoretical curves with the experimental curves of Andrews. 

अथवा

एक वास्तविक गैस के लिए वान डर वाल्स समीकरण व्युत्पन्न कीजिए तथा वान डर वाल्स बल की प्रकृति की व्याख्या कीजिए। इसकी प्रायोगिक P-V वक्रों से तुलना भी कीजिए। वान डर वाल्स समीकरण की कमियाँ लिखिए। 

Deduce van der Waal’s equation of state for a real gas and discuss nature of van der Waal’s forces. Also compare it with experimental P-V curves. Write drawbacks of van der Waal’s equation. 

अथवा

एक वास्तविक गैस के लिए वान डर वाल्स समीकरण व्युत्पन्न कीजिए। बॉयल ताप व वान डर वाल्स नियतांकों में तथा बॉयल ताप व क्रान्तिक ताप में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। 

Deduce van der Waals equation of state for a real gas. Establish relations between Boyle temperature and van der Waals constants and between Boyle temperature and critical temperature. 

अथवा

बॉयल ताप क्या है? बॉयल ताप के लिए सूत्र स्थापित कीजिए। बॉयल ताप, व्युत्क्रमण ताप व क्रान्तिक ताप के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए। 

What is Boyle temperature? Find an expression for Boyle temperature. Establish a relation between Boyle temperature, temperature of inversion and critical temperature. 

उत्तर : आदर्श गैस समीकरण Pi Vi  = RT को स्थापित करते समय निम्नलिखित संकल्पनाएँ की गई थीं

गैस के अणु अत्यन्त छोटे आकार के होते हैं, जिससे उनके द्वारा घेरा गया आयतन, गैस के कुल आयतन के सापेक्ष उपेक्षणीय है।
अणु एक-दूसरे पर आकर्षण बल नहीं लगाते हैं अर्थात् अणुओं की केवल गतिज ऊर्जा होती है, स्थितिज ऊर्जा नहीं।
वास्तविक गैसों के अणुओं के लिए संकल्पनाएँ उचित नहीं हैं क्योंकि इन गैसों के ना का एक परिमित आकार होता है तथा वे एक-दसरे को आकर्षित भी करना इस कारण वास्तविक गैस का अवस्था समीकरण, आदर्श गैस के समीकरण से भिन्न होगा।

वान डर वाल्स ने वास्तविक गैसों के व्यवहार की व्याख्या करने के लिए अणओं के परिमित आकार एवं अन्तरापरमाणुक बल को नगण्य नहीं माना।

अणुओं का परिमित आकार (Finite size of Molecules)-आदर्श गैस का समीकरण PV = RT को प्राप्त करने के लिए हम मानते हैं कि अणुओं का आयतन, गैस आयतन V; के सापेक्ष नगण्य है तथा गैस का सारा आयतन उन्हें गति के लिए उपलब्ध है परन्तु सब अणुओं का आयतन कुछ स्थान घेरता है जिससे आदर्श गैस के आयतन का प्रभावी मान Vi = (V-b) है, जहाँ V; आदर्श गैस के 1 ग्राम-अणु का आयतन है तथा V | वास्तविक गैस के 1 ग्राम-अण का आयतन है।
अन्तरा-अणुक बल (Inter-molecular force) आदर्श गैस परिकल्पना में यह भी माना गया था कि गैस में अणुओं के मध्य कोई बल आरोपित नहीं होता। यह कल्पना गैस के कम दाब एवं उच्च ताप की स्थिति में कुछ सीमा तक सही हो सकती है क्योंकि इस समय अणुओं के बीच की दूरी अधिक होती है, परन्तु अधिक दाब व कम ताप की स्थिति में, जब अणु पास-पास होते हैं, उनके बीच लगने वाले आकर्षण बल को नगण्य नहीं माना जा सकता। बर्तन के मध्य स्थित अणु पर चारों ओर से आकर्षण बल कार्य करते हैं, अत: उस पर कोई प्रभावी बल नहीं लगता। जो अणु दीवार के पास होता है उस पर एक बल अन्दर की ओर लगता है, जिससे दीवार से टकराते समय उनके संवेग में कुछ कमी आ जाती है। अतः अणद्वारा दीवार पर आरोपित बल माने गए बल से कम होता है, जिसके फलस्वरूप दीवार पर वास्तविक गैस का दाब भी आदर्श गैस के दाब से कम होगा, अर्थात्

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इसे वान डर वाल्स समीकरण कहते हैं। वास्तविक गैसें इस समीकरण का निम्न ताप वै उच्च दाब पर भी पालन करती हैं।

क्रान्तिक नियतांक (Critical Constant)-समीकरण (1) को निम्नलिखित प्रकार से लिख सकते है

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यदि CO2 गैस के लिए हम इस समीकरण के अनुसार भिन्न-भिन्न स्थिर तापों पर Pव Vके बीच ग्राफ खींचें तो हमें चित्र-7 के अनुसार समतापी वक्र प्राप्त होते हैं। ताप 31• 4°C से नीचे वाले समतापी वक्रों में उच्चिष्ठ (maxima) तथा निम्निष्ठ (minima) प्राप्त होते हैं, जबकि इसके ऊपर वाले वक्रों में प्राप्त नहीं होते। इसका तात्पर्य है कि यदि CO2 गैस को 31.4°C से ऊँचे ताप पर संपीडित करें तो CO2 गैस को द्रव में नहीं बदला जा सकता, चाहे कितना ही दाब लगा दें। इस ताप को CO2 गैस का क्रान्तिक ताप (T.) कहते हैं। क्रान्तिक ताप पर गैस को द्रवित करने के लिए आवश्यक दाब गैस का क्रान्तिक दाब (P) कहलाता है। क्रान्तिक ताप तथा क्रान्तिक दाब पर गैस के  एकांक द्रव्यमान का आयतन क्रान्तिक आयतन (Vc) कहलाता है।

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बॉयल ताप (Boyle Temperature)—आदर्श गैस समीकरण PV = RT के अनुसार किसी गैस के लिए गुणनफल PV नियत ताप पर, स्थिर रहना चाहिए। वास्तविक गैसें इससे विचलित पायी जाती हैं। उनके लिए, स्थिर ताप पर जैसे-जैसे P का मान बढ़ता है, PV परिवर्तित होता जाता है। यह परिवर्तन भिन्न-भिन्न तापों पर भिन्न-भिन्न होता है। परन्तु एक विशेष ताप पर, P के एक पर्याप्त परास में PV स्थिर रहता है, जबकि P बहुत अधिक न हो। इस ताप को ‘बॉयल ताप’ कहा जाता है तथा इसका मान भिन्न-भिन्न गैसों के लिए भिन्न-भिन्न होता है।

वान डर वाल्स गैस के लिए बॉयल ताप ज्ञात करने के लिए—

 

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अत: यदि Tc व Pc के मान ज्ञात हों तो ‘a’ तथा ‘b’ की गणना की जा सकती है।

वान डर वाल्स बलों की प्रकृति

(Nature of van der Waal’s Forces) 

दो अणुओं के मध्य जब दूरी कुछ ऐंग्स्ट्रॉम (~5 ऐंग्स्ट्रॉम) होती है तो उनके मध्य एक हल्का आकर्षण बल कार्य करता है, परन्तु जब दोनों के बीच की दूरी और कम होती है तो एक तीव्र प्रतिकर्षण बल कार्य करने लगता है। इस कारण अणु पृथक्-पृथक् रहते हैं। अत: प्रकार के होते हैं—

(1) अधिक दूरी वाले बल

(2) कम दूरी वाले बल

अधिक दूरी के हल्के आकर्षण बल को वान डर वाल्स बल कहते हैं। ये बलवा” के इलेक्ट्रॉन एवं नाभिकों के मध्य आकर्षण के कारण उत्पन्न होते हैं, अतः इनका स्थिर-विद्युतीय होती है।

यदि दो अणुओं के बीच दूरी तथा उनके मध्य बल का ग्राफ खाच समान वक्र प्राप्त होता है।

किसी दूरी d पर दोनों बल सन्तुलित होते हैं। यदि दूरी कम हो तो उनके मध्य प्रतिकर्षण जीवता से बढ़ता है। जब अणुओं के मध्य दूरी d से अधिक होती है तो आकर्षण एक सीमा तक अधिकतम बढ़ता है। फिर तीव्रता से घटकर अधिक दूरी पर नगण्य हो जाता है। अध्रुवीय अणुओं के लिए आकर्षण बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

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वान डर वाल्स समीकरण की कमियाँ (Drawbacks of van der Waal’s Equation)– यद्यपि गुणात्मक रूप में वान डर वाल्स समीकरण तथा प्रायोगिक समतापी वक्रों में अधिकांशत: सहमति पायी जाती है, परन्तु फिर भी यह समीकरण वास्तविक गैसों के व्यवहार को परिमाणात्मक रूप से परिशुद्धता के साथ नहीं दर्शाती।

परिमाणात्मक रूप में सहमति देखने के लिए वान डर वाल्स समीकरण द्वारा प्राप्त क्रान्तिक नियतांकों के मानों की प्रायोगिक रूप से प्राप्त मानों से तुलना करते हैं, तब इस समीकरण में निम्नलिखित कमियाँ पायी जाती हैं

(क) वान डर वाल्स समीकरण के अनुसार, सभी गैसों के लिए VC = 36 है जबकि b का मान प्रत्येक गैस के लिए भिन्न-भिन्न परन्तु प्रयोगों द्वारा हाइड्रोजन के लिए Vc = 2.86 तथा आर्गन के लिए V = 1. 41 b पाया जाता है।

(ख) वान डर वाल्स समीकरण के अनुसार, क्रान्तिक गुणांक RTc/PcVc का मान सभी गैसों

के लिए 2.67 होना चाहिए, परन्तु प्रयोगों द्वारा यह ज्ञात होता है कि इसका मान 3.03 (हाइड्रोजन के लिए) तथा 4.99 (ऐसीटिक अम्ल के लिए) के मध्य परिवर्तित होता है।

इन कमियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वान डर वाल्स की समीकरण वास्तविक गैसों के व्यवहार को केवल ‘लगभग’ प्रदर्शित करती है।

एन्ड्रज के प्रायोगिक वक्रों से तुलना (Comparison with Andrew’s Experimental Curves)-प्रायोगिक परिणामों से तुलना करने के लिए वान डर वाल्स समीकरण को निम्नलिखित रूप में परिवर्तित किया जाता है

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उपर्युक्त समीकरण में CO, के लिए प्रयोगों द्वारा ज्ञात ‘a’ तथा ‘8’ के मान रखकर विभिन्न स्थिर तापों पर, P तथा V के बीच ग्राफ खींचे जाते हैं। चित्र-9 में इस प्रकार के सैद्धान्तिक समतापी वक्र (theoretical isothermals) खींचे गए हैं। इनमें तापों को सम्मिलित किया गया है जिन पर एन्ड्रज ने प्रायोगिक वक्र खींचे थे।

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इन वक्रों से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि ये सैद्धान्तिक वक्र प्रायोगिक वक्रों से विशेष रूप से उच्च तापों पर बहुत कुछ समानता रखते हैं, परन्तु निम्न तापों वाले वक्रों में महत्त्वपूर्ण अन्तर परिलक्षित होता है। इस अन्तर को स्पष्ट करने के लिए हम 13.1°C वाले वक्रों पर विचार करते हैं। सैद्धान्तिक वक्र में एक सतत भाग Bbcc है जिसमें 6 पर उच्चिष्ठ तथा c पर निम्निष्ठ है (चित्र-9); जबकि प्रायोगिक वक्र में एक सरल रेखा प्राप्त होती है।

इसका कारण यह है कि सैद्धान्तिक वक्र का भाग bc यह प्रदर्शित करता है कि दाब क घटने पर आयतन भी घटना चाहिए। यह एक पूर्णतया अस्थायी अवस्था है जिसे व्यावहारिक रूप में प्राप्त करना असम्भव है। अत: एन्ड्रज के प्रायोगिक वक्र में यह अवस्था प्राप्त नहीं होता इसी प्रकार सैद्धान्तिक वक्र के भाग Bb तथा cC क्रमशः अतिशीतल वाष्पावस्था (super-cooled vapour state) तथा अतितप्त द्रव अवस्था (super-heated liquid State) को व्यक्त करते हैं। ये अवस्थाएँ भी बहुत कुछ अस्थायी हैं तथा अत्यन्त विशिष्ट रिस्थितियों में ही प्राप्त हो सकती हैं। एन्ड्रज के प्रयोगों में गैस सदैव स्थायी साम्यावस्था में रहती है। अत: एन्ड्रज वक्र में केवल एक सरल रेखा प्राप्त होती है।

 


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