vapourization temperature T Physcis Notes

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vapourization temperature T Physcis Notes:-The Laws of Thermodynamics: The Zeroth law, various indicator diagrams, work done by and on the system, first law of thermodynamics. internal energy as a state function and other applications. Reversible and irreversible changes. Carnot cycle and its efficiency, Carnot theorem and the second law of thermodynamics. Different versions of the second law, practical cycles used in internal combustion engines. Entropy, principle of increase of entropy. The thermodynamic scale of temperature, its identity with the perfect gas scale. Impossibility of attaining the absolute zero, third law of thermodynamics. Thermodynamics Relationships: Thermodynamic variables: extensive and intensive, Maxwell’s general relationships, application to Joule-Thomson cooling and adiabatic cooling in a general system,vander Waal’s gas, Clausius-Clapeyron heat equation. Thermodynamic potentials and equilibrium of thermodynamical systems, relation with thermodynamical variables. Cooling due to adiabatic demagnetization. Production and measurement of very low temperatures.

 

प्रश्न 21. क्लॉसियस की द्वितीय गुप्त ऊष्मा समीकरण निगमित कीजिए 

Deduce Clausius Clapeyron Notes
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S1 S2 क्रमशः द्रव तथा संतृप्त वाष्प की विशिष्ट ऊष्माएँ हैं तथा L, ताप T पर वाष्पन की गुप्त ऊष्मा है।

Deduce the second latent heat equation of Clausius:

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Where S1 and S2 are the specific heats of liquid and saturated vapour respectively and L is the latent heat of vapourization at temperature T.

 

उत्तर : क्लॉसियस की द्वितीय गुप्त ऊष्मा समीकरण (Second Latent Heat Equation of Clausius)-सन् 1950 ई० में क्लॉसियस ने कानों वक्र के उपयोग से क्लॉसियस-क्लैपेरॉन समीकरण में सुधार किया तथा संतृप्त वाष्पों की विशिष्ट ऊष्मा पर दाब के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक समीकरण निगमित की जिसे द्वितीय गुप्त ऊष्मा समीकरण कहते हैं। यह समीकरण ताप के साथ पदार्थ की गुप्त ऊष्मा दर्शाती है तथा पदार्थ की दो प्रावस्थाओं में विशिष्ट ऊष्मा को सम्बन्धित करती है।

माना किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान के लिए दो अति निकट तापों T व T + dT पर दो समतापी वक्र ABCD व EFGH पदार्थ की द्रव अवस्था से वाष्प अवस्था में परिवर्तन दर्शाते हैं। वक्रों के भाग AB व EF पदार्थ की A द्रव अवस्था को, BC व FG द्रव से वाष्प में  परिवर्तन को तथा CD व GH असंतप्त वाष्प P+dRAFT+0 अवस्था को दर्शाते हैं। बिन्दु Bव F पर पदार्थ उ पूर्णतया द्रव अवस्था में है तथा C व G पर पूर्णतया संतृप्त वाष्प अवस्था में है। बिन्दुदार वक्र पदार्थ की द्रव अवस्था परिवर्तन एवं वाष्प

आयतन(V) अवस्था के क्षेत्रों को अलग करने वाली  परिसीमा (boundary) को दर्शाता है।

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माना ताप T व T + dT पर द्रव के संतृप्त वाष्प दाब क्रमश: P व P+ dP हैं। बिन्दु F व G पर पदार्थ के आयतन क्रमश: V1 व V2 हैं। ताप T व T + dT पर वाष्पन की गुप्त .. ऊष्माएँ क्रमश: L व L+dL हैं। S1 वाष्प के सम्पर्क में द्रव की विशिष्ट ऊष्मा तथा S2 द्रव के सम्पर्क में संतृप्त वाष्प की विशिष्ट ऊष्मा है। माना पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को चक्र BFGCB के अनुदिश ले जाया जाता है जो कि कानों चक्र नहीं है।

B से F तक जाने में पदार्थ (द्रव) का ताप T से बढ़कर T + dT हो जाता है, अर्थात् इसका ताप dT बढ़ जाता है, अत: पदार्थ द्वारा अवशोषित ऊष्मा की मात्रा = S1 dT

 

F से G तक पदार्थ नियत ताप (T + dT ) पर द्रव से वाष्प में परिवर्तित होता है, अत: पदार्थ द्वारा अवशोषित ऊष्मा = L + dL

 

G से C तक पदार्थ (वाष्प) का ताप T + dT से गिरकर T हो जाता है अर्थात् ताप dT घट जाता है, अत: पदार्थ द्वारा निष्कासित ऊष्मा = S2 dT

C से B तक पदार्थ नियत ताप (T) पर वाष्प से द्रव में द्रवित होता है, अतः पदार्थ द्वारा निष्कासित ऊष्मा = L

सम्पूर्ण चक्र BFGCB में पदार्थ द्वारा अवशोषित परिणामी ऊष्मा

 

dQ = S1dT + L + dL – S2dT – L

 

अथवा                      dQ = (S1 – S2) dT + dL

 

चूँकि सम्पूर्ण चक्र में पदार्थ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में आ जाता है, अत: इसकी आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है अर्थात् dU=0 ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,

 

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where Es and ET are the adiabatic and isothermal elasticities of the system.

 

अथवा

(a) मैक्सवेल के ऊष्मागतिक सम्बन्धों को व्युत्पन्न कीजिए। 

(b) मैक्सवेल के ऊष्मागतिकीय सम्बन्धों का प्रयोग करते हुए दर्शाइए कि सभा पदार्थों के लिएरुद्धोष्म समतापीय प्रत्यास्थता का अनुपात CRIC, के बराबर हाताहा 

 

(a) Derive Maxwell’s thermodynamic relations. 

(b) Using Maxwell’s relation show that the ratio of adiabatic to isothermal elasticity is equal to Cp/C, for all substances. 

 

अथवा

मैक्सवेल के चार ऊष्मागतिक सम्बन्ध लिखिए और सिद्ध कीजिए कि सभी पदाथा के लिए रुद्धोष्म समतापी प्रत्यास्थताओं की निष्पत्ति CLIC, के बराबर होती है। 

 

Write the four thermodynamic relations and prove that the ratio of adiabatic to isothermal elasticity is equal to Co/C, for all substances.

 

उत्तर : ऊष्मागतिकी के प्रथम व द्वितीय नियमों को निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा . सकता है

 

                           dQ = du+dw = dU + PdV

तथा                    dQ = TdS  

 

इन दोनों समीकरणों से,

dU = TDS – PDV

 

माना x, v दो स्वतन्त्र चर हैं, जो दिए हुए पदार्थ के एक निश्चित द्रव्यमान की अवस्था को व्यक्त करते हैं। माना U, Vतथा S तीनों ही x तथा y के फलन हैं, तब

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चूंकि x तथा । स्वतन्त्र चर हैं, अत: उपर्युक्त समीकरण में dx तथा dy के गुणक समान होने चाहिए।

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समीकरण (4) ऊष्मागतिकी सम्बन्धों के लिए व्यापक समीकरण है। मैक्सवेल के सम्बन्ध प्राप्त करने के लिए x तथा y के स्थान पर P, V, T तथा 5 में से कोई भी दो चर प्रयुक्त किए जा सकते हैं। __(1)

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where the symbols have their usual meaning. 

उत्तर : आन्तरिक ऊर्जा तथा मुक्त ऊर्जा (Internal Energy and Free Energy) : किसी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा वह ऊर्जा है जो निकाय के आण्विक संघटन (molecular constitution) व गति (motion) के कारण होती है। इसे U से प्रदर्शित करते हैं।

निकाय की मुक्त ऊर्जा निम्नलिखित सूत्र द्वारा दी जाती है

F = U – TS

 

जहाँ T, निकाय की कैल्विन ताप है तथा S एन्ट्रॉपी है। माना कि निकाय में अनन्त-सूक्ष्म उत्क्रमणीय परिवर्तन होता है। तब F में परिवर्तन ।

dF = dU – (T ds+S dt)

 

परन्तु dU = dQ-dW (पहला नियम)

तथा dQ = T dS (दूसरा नियम); जिससे dU = T ds – dw

अतः  dF = (T ds – dw)- (T ds + S dT)

= —dw – SdT

 

यदि परिवर्तन समतापी है (dT = 0), तब

dF = – dw

 

इस प्रकार, किया गया कार्य मुक्त कार्य में परिवर्तन के ठीक बराबर है। इसका अर्थ है कि उत्क्रमणीय समतापी परिवर्तन में, सम्पूर्ण बाह्य कार्य dw निकाय की मक्त ऊर्जा से प्राप्त होता है। अत: किसी निकाय की मुक्त ऊर्जा वह ऊर्जा है जो उत्क्रमणीय समतापी परिवर्तन में कार्य के लिए उपलब्ध होती है। इस प्रकार, यह यान्त्रिक निकाय की स्थितिज ऊर्जा के समकक्ष है।

 

अब समीकरण (1) को निम्नवत् लिखा जा सकता है

U = F + TS

 

इससे स्पष्ट है कि किसी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा के दो भाग होते हैं–(i) मुक्त ऊर्जा F जो उत्क्रमणीय समतापी परिवर्तनों में कार्य के लिए उपलब्ध होती है, तथा (ii) गुप्त (अथवा बद्ध) ऊर्जा ‘TS जो उपयोगी कार्यों के लिए अनुपलब्ध (unavailable) है। जैसे-जैसे एन्ट्रॉपी बढ़ती है, अनुपलब्ध ऊर्जा भी बढ़ती है तथा उपलब्ध ऊर्जा घटती है।

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यही गिब्सहेल्महोल्ट्ज समीकरण है। 


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