Polymorphism Bsc zoology 1st year Notes

Polymorphism Bsc zoology 1st year Notes

Polymorphism Bsc zoology 1st year Notes

 

Polymorphism Bsc zoology Notes :- Hello friends in this post we have share polymorphism this is the best topic of bsc zoology first year program.

 


 

प्रश्न 2 – ओबीलिया कॉलोनी में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवकों का वर्णन कीजिए।

Describe the various zooids found in the Obelia colony. 

अथवा बहुरूपता से आप क्या समझते हैं? किसी सीलेन्ट्रेट का उदाहरण देते हुए सार्थक करें।

What do you mean Polymorphism. Explain it with the example of any Coelenterate. 

अथवा मेड्यूसा का नामांकित चित्र बनाइए।

Draw a labelled diagram of Medusa. 

अथवा मेड्यूसा में स्टैटोसिस्ट पर टिप्पणी कीजिए। 

Write note in statoyst in Medusa.

उत्तर –

बहुरूपता (Polymorphism) 

ओबीलिया में तीन तीन प्रकार के जीवक (zooids) पाए जाते हैं। इनके कार्य भी भिन्न – भिन्न होते  हैं। इसीलिए ओबीलिया बहुरूपी जन्तु कहलाता है और इसी को बहुरूपता कहते हैं।

ओबीलिया के जीवक

(Zooids of Obelia)

ओबीलिया में तीन प्रकार के जीवक पाए जाते हैं

  1. पॉलिप या हाइड्रैन्थ-ये पोषक का कार्य करते हैं इसीलिए उन्हें जठार (gastrozooids) कहते हैं।
  2. ब्लास्टोस्टाइल-ये जनन का कार्य करते हैं। इन्हें जननजीवक (gonozooids) कहते हैं।

III. मेड्यूसा – ये लैंगिक जीवक हैं।

  1. पॉलिप या हाइड्रैन्थ (Polyp or Hydranth)

पॉलिप हाइड्रोकोलाई के स्वतन्त्र सिरों पर लगे होते हैं तथा हाइड्रोकोलाई जड़ के समान स्टोलन या हाइड्रोमूल (hydrorhiza) से निकलते हैं। प्रत्येक पॉलिप एक बेलनाकार शंकु के समान खोखले थैले जैसी रचना है।

संरचना (Structure)-पॉलिप के शरीर को निम्नांकित भागों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. वृन्त (Stalk)-हाइड्रैन्थ के है आधार का भाग खोखले वृन्त के रूप में होता है और हाइड्रोकोलस से जुड़ा रहता है।
  2. हाइपोस्टोम (Hypostome) —शरीर का अगला 1/3 भाग शंक्वाकार होता है जो हाइपोस्टोम, ओरल कोन या मैनुब्रियम कहलाता है। इसके शीर्ष पर एक मुख होता है। इसको छोटा अथवा बड़ा किया जा सकता है। मुख को घेरे हुए स्पर्शकों या टेन्टेकिल्स का एक घेरा होता है। स्पर्शक लम्बे, ठोस तथा फिलिफॉर्म होते हैं। मुख हाइड्रैन्थ की मध्य गुहा में खुलता है जिसे

    Polymorphism Bsc zoology Notes
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जठरवाही गुहा (gastrovascular cavity) या सीलेन्ट्रॉन कहते हैं। यह हाइड्रोकोलस की सीनोसार्क गुहा से सम्बन्धित होती है।

हाइड्रैन्थ की देहभित्ति में दो स्तर होते हैं-

  1. एक्टोडर्म
  2. एण्डोडर्म

मुख के समीप दोनों स्तर एक-दूसरे से मिल जाते हैं तथा शरीर के शेष भाग में अकोशीय, जिलेटिन की बनी मीसोग्लिया (mesoglaea) द्वारा अलग रहते हैं। पॉलिप के चारों ओर एक पतला रक्षात्मक आवरण पेरिसार्क (perisarc) होता है। पेरिसार्क फैलकर एक पारदर्शी शंक्वाकार प्याले के समान रचना बना लेता है

जो हाइड्रोथीका (hydrotheca) कहलाता है। हाइड्रैन्थ के आधार पर हाइड्रोथीका भीतर की ओर क्षैतिज पट्टी (horizontal shelf)  बनाता है जिस पर पॉलिप स्थिर रहता है। क्षैतिज पट्टी सिकड़कर पॉलिप को सीनोसार्क के भीतर जाने से रोकती है।

Polymorphism Bsc zoology Notes
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हाइड्रैन्थ पोषक जीवक हैं जिनका मुख्य कार्य निवह को । पोषण पहुँचाना है। ये जल में पाए जाने वाले सूक्ष्म जन्तुओं को ” खाते हैं। इनके स्पर्शक जो दंश कोशिकाओं से सुसज्जित रहते हैं, शिकार को पकड़ते और मुख में पहुंचाते हैं। जठर चर्म की ग्रन्थि कोशिकाओं से स्रावित पाचक रस पॉलिप की सीलेन्ट्रॉन में ही भोजन का आंशिक बहिःकोशिकीय पाचन कर देते हैं।

  1. ब्लास्टोस्टाइल या गोनेन्जिया (Blastostyle or Gonangia)

ब्लास्टोस्टाइल बेलनाकार जीवक हैं। ये अलैंगिक जनन के लिए विशेष आकार ग्रहण कर लेते हैं। ये पॉलिप के कक्ष में होते हैं। ब्लास्टोस्टाइल की देहभित्ति दोहरी दीवार की बनी होती है तथा इसके मध्य में एक खोखला स्थान होता है, जो आँतर गुहा या जठरवाही गुहा कहलाता है। आँतर गुहा बहुत छोटी तथा प्रारम्भिक अवस्था में होती है तथा बाहर नहीं खुलती। इसका दूरस्थ सिरा एक चपटी पट्टी द्वारा बन्द होता है। मुख तथा स्पर्शक नहीं होते और यह भोजन ग्रहण नहीं करता। प्रत्येक ब्लास्टोस्टाइल के चारों ओर एक ढीला पारदर्शी पेरिसार्क का आवरण होता है जिसे गोनोथीका (Gonotheca) कहते हैं।

III. मेड्यूसा (Medusa) (Polymorphism Bsc zoology Notes)

मेंड्यसा ओबीलिया के लैंगिक जीवक हैं। ये ब्लास्टोस्टाइल के अक्ष से जुड़ी रहती हैं। वसन्त तथा ग्रीष्म में ये ब्लास्टोस्टाइल के सानासार्क से खोखली कलिकाओं के रूप में निकलती हैं। पूर्ण वृद्धि प्राप्त करने पर इनका व्यास लगभग 6 या 7 मिमि होता है।

Polymorphism Bsc zoology Notes
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प्रत्येक मेड्युसा तश्तरी या घण्टी के आकार की रचना है –

जिसकी बाहरी सतह उत्तल (convex) तथा भीतर की अवतल (concave) होती है। इसकी उत्तल सतह (umbrellar surface) तथा अवतल सतह अवछत्रीय सतह (subuni surface) कहलाती है। अवछत्रीय सतह के मध्य में एक छोटी, खोखली मैनुब्रियम होती हैजिसके स्वतन्त्र सिरे पर एक चौकोर मुख होता है। अम्ब्रेला का स्वतन्त्र किनारा भीतर की ओर एक पतली पर्त के रूप में उभरा रहता है जिसे वीलम (velum) कहते हैं। वीलम के किनारे पर छोटे, ठोस तथा लचीले स्पर्शक होते हैं। प्रारम्भ में इन स्पर्शकों की संख्या 16 होती है, किन्त बाद में मेड्यूसा की आयु के साथ इनकी संख्या बढ़ती जाती है। प्रारम्भिक 16 स्पर्शकों के विन्यास निश्चित होता है। चार स्पर्शक पर- रेडियल, चार स्पर्शक इण्टर-रेडियल तथा शेष आठ एड-रेडियल होते हैं जो कि प्रत्येक पर-रेडियल तथा इण्टर-रेडियल स्पर्शकों के बीच स्थित होते हैं। सभी आठ एड-रेडियल स्पर्शकों के आधार फूलकर द्रव से भरे हुए थैले के समान रचना बनाते हैं जिन्हें स्टेटोसिस्ट कहते हैं। ये संवेदी अंग हैं तथा इनकी खोखली गुहा में Caco के कण पाए जाते हैं। ये कण लिथोसिस्ट (स्टेटोलिथ) कहलाते हैं। सभी 16 स्पर्शकों के आधार, अन्तराल कोशिकाओं के एकत्रित होने से फूलकर बल्ब के समान हो जाते हैं।

Polymorphism Bsc zoology Notes
Polymorphism Bsc zoology Notes

मैनुब्रियम पर स्थित मुख भीतर की ओर जठर गुहा या आमाशय में खलता है। आमाशय से चार सँकरी अरीय नाल निकलती हैं, जो एक-दूसरे के लम्बरूप स्थित होती हैं तथा अम्ब्रेला के किनारों की ओर बढ़कर वर्तुल नाल (circular canal) में खुलती हैं। वर्तुल नाल अम्ब्रेला के किनारे के साथ फैली होती है। लैंगिक रूप से परिपक्व मेड्यूसा में जनद के चार समूह होते हैं जो मेड्यूसा की सब-अम्ब्रेला सतह पर चारों अरीय नालों के बीच स्थित होते हैं। मेड्यूसा एकलिंगी होते हैं। मेड्यूसा में प्राय: अरीय सममिति (radial symmetry) उपस्थित होती है क्योंकि मेड्यूसा का आकार इस प्रकार का होता है कि इसको त्रिज्या से काटे जाने पर प्रत्येक भाग दूसरे भागों से समानता दर्शाता है।

मेड्यूसा भी द्विस्तरीय जीवक हैं। अम्ब्रेला की दोनों सतह एक्टोडर्म की बनी होती हैं तथा एण्डोडर्म केवल जठर गुहा, अरीय नाल तथा वर्तल नाल को आस्तरित करती है।


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