Interaction Of Genes Bsc Zoology Question Answer Notes

Interaction Of Genes Bsc Zoology Question Answer Notes

 

Interaction Of Genes Bsc Zoology Question Answer Notes :- In this post all the questions of the second part of zoology are fully answered. This post will provide immense help to all the students of BSc zoology. All Topic of zoology is discussed in detail in this post.

 


 

प्रश्न 11 – जीनों की पारस्परिक क्रिया का वर्णन कीजिए।

Describe Interaction of genes. 

उत्तर –

जीनों की पारस्परिक क्रिया 

(Interaction of Genes) Notes

यह आवश्यक नहीं है कि कोई एक लक्षण केवल एक ही जीन द्वारा नियन्त्रित हो बल्कि यह एक से अधिक जीनों से भी नियन्त्रित हो सकता है। इस प्रकार की परिस्थिति में एक विशेष लक्षणप्ररूप को उत्पन्न करने के लिए दो या दो से अधिक जीनों में पारस्परिक क्रिया हो सकती है। उदाहरण के लिए यदि जीन “A” लक्षणप्ररूप A और जीन “B” लक्षणप्ररूप B के लिए उत्तरदायी है तो अब “A” और “B” दोनों एक साथ उपस्थित होंगे तो उनसे एक लक्षणप्ररूप < उत्पन्न हो सकता है। परन्तु ये जीन ऐसी स्थिति में भी विसंयोजन एवं स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियमों का पालन करते हैं। यदि “A” तथा “B” दो ऐसे जीन हैं जिनमें से प्रत्येक अपने अप्रभावी युग्मविकल्पी “a” तथा “b” पर प्रभावी है तो उनकी पारस्परिक क्रिया निम्न दशाओं पर निर्भर करेगी

(1) दोनों प्रभावी युग्मविकल्पियों “A” तथा “B” की उपस्थिति, (2) केवल “A” की उपस्थिति, (3) “B” की उपस्थिति अथवा (4) “A” तथा “B” दोनों की अनुपस्थिति।

Table : F (AbBb) सन्तति से F2 सन्तति में प्राप्त होने वाले जीन प्ररूपी संक्षिप्त जीन प्ररूपी अनुपात। 

 

जीन प्ररूपी प्ररूपी अनुपात संक्षिप्त जीन प्ररूप (Abbreviated genotype)

 

संक्षिप्त जीन प्रारुपी अनुपात (Abbreviated genotypic ratio)
AABB 1
AaBB 2 AB 9
AABb 2
AaBb 4
AAbb

 

1 Ab 3
Aabb 2
aaBB 1 aB 3
aaBb 2
aabb 1 ab 1

 

दो से अधिक जीनों के बीच भी पारस्परिक क्रिया सम्भव होती है, परन्तु ऐसा ५ में इनका अध्ययन कुछ और जटिल हो जाता है।

Interaction Of Genes Bsc Zoology Question Answer Notes
Interaction Of Genes Bsc Zoology Question Answer Notes

एक ही लक्षण को प्रभावित करने वाले दो जीन युग्म (Two gene pairs . affecting same character) कुक्कुटों में पायी जाने वाली कलगी (comb) की आकृति के लिए उत्तरदायी होते हैं। इनमें से एक जीन द्वारा रोज़ कलगी (rose comb) तथा दूसरे के द्वारा पी कलगी (pea comb) बनती है। इनमें से प्रत्येक जीन सिंगल कलगी (single comb) के ऊपर प्रभावी होता है। परन्तु जब इन दोनों को ही परस्पर मिलाया जाता है तो एक नया लक्षण प्ररूप वालनट (walnut) प्रगट होता है।

डब्ल्यू बेटसन एवं आर सी पुन्नेट द्वारा किए गए प्रयोग के अनुसार जब दोनों प्रभावी युग्मविकल्पी उपस्थित होते हैं तो वालनट लक्षणप्ररूप प्रकट होता है और जब दोनों अप्रभावी युग्मविकल्पी समयुग्मजी होते हैं तो सिंगल कलगी (single comb) प्रगट होती है। रोज़ कलगी एवं पी कलगी वाले लक्षणप्ररूप उस समय प्रकट होते हैं जब केवल एक प्रभावी युग्मविकल्पी (समयुग्मजी अवस्था में अथवा विषमयुग्मजी अवस्था में) उपस्थित हो। यदि पी (rrPP) एवं रोज़ (RRpp) के बीच अथवा वालनट (RRPP) एवं सिंगल (rrpp) के बीच सकरण कराया जाता है तो दोनों ही दशाओं में F सन्तति दोनों जीनों के लिए विषमयुग्मजी (RrPp) होगी और वालनट प्ररूप को प्रकट करेगी। इस प्रकार प्राप्त F, सन्तति के जीनों में परस्पर संकरण कराने पर 9 : 3 : 3 : 1 के अनुपात में चार लक्षणप्ररूप प्राप्त होंगे।

 


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