BSc Notes Physical Significance

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BSc Notes Physical Significance:-The Laws of Thermodynamics: The Zeroth law, various indicator diagrams, work done by and on the system, first law of thermodynamics. internal energy as a state function and other applications. Reversible and irreversible changes. Carnot cycle and its efficiency, Carnot theorem and the second law of thermodynamics. Different versions of the second law, practical cycles used in internal combustion engines. Entropy, principle of increase of entropy. The thermodynamic scale of temperature, its identity with the perfect gas scale. Impossibility of attaining the absolute zero, third law of thermodynamics.

खण्ड

प्रश्न 12. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम लिखिए तथा इसकी भौतिक महत्ता समझाइए। इसके अनुप्रयोग भी दीजिए। 

State the first law of thermodynamics and explain its physical significance. Also give its applications. 

उत्तर : ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics)— ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा-संरक्षण के नियम का ही एक रूप है। इसे निम्न प्रकार व्यक्त कर सकते हैं

जब ऊर्जा के अन्य रूपों को ऊष्मा अथवा ऊष्मा को ऊर्जा के अन्य रूपों में रूपान्तरित करते हैं तब इन ऊर्जाओं तथा रूपान्तरित ऊष्मा के बीच एक निश्चित अनुपात होता है। 

गणितीय रूप से, जब कोई निकाय एक प्रारम्भिक अवस्था में से अन्तिम अवस्था में पहुँचता है तो निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन

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जहाँ Q निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा तथा W निकाय द्वारा किया गया कार्य है। यह समीकरण गणितीय रूप में ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम कहलाती है (इसमें U,Q तथा W तीन राशियाँ एक ही मात्रक में ली जानी चाहिए)।

यदि किसी प्रक्रम में निकाय को अनन्त-सूक्ष्म ऊष्मा dQ दी जाती है तथा निकाय द्वारा अनन्त-सूक्ष्म कार्य dw किया जाता है तो निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन भी अनन्त-सूक्ष्म dU होगा, तब

                    dU = dQ — dw

अथवा            dU = dQ — dw

यह ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का अवकल रूप (differential form) है।

महत्ता (Significance)-ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम में तीन तथ्य निहित हैं (i) ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है, (ii) ऊष्मागतिकी निकाय में ऊर्जा संरक्षित रहती है तथा (iii) साम्यावस्था में प्रत्येक ऊष्मागतिक निकाय में आन्तरिक ऊर्जा होती है जो केवल निकाय की अवस्था पर निर्भर करती है।

इस प्रकार प्रथम नियम ऊष्मा तथा ऊर्जा के अन्य रूपों के बीच सही सम्बन्ध स्थापित करता है।

अनुप्रयोग (Applications)-ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं

  1. चक्रीय प्रक्रम (Cyclic Process)-“जब कोई निकाय भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में से गुजरता हुआ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में लौट आता है तो इसे चक्रीय प्रक्रम कहते है। इस प्रक्रम में निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन शुन्य (U = 0) होता है अथार आन्तरिक ऊर्जा नियत रहती है।
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विलग निकाय (Isolated System)-“ऐसा निकाय, जो न बाहर से ऊष्मा लेता है और न ही कोई बाह्य कार्य करता है (अर्थात = W = 0) विलग निकाय कहलाता है।”

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उदाहरणजब किसी गाड़ी का टायर अचानक फट जाता है तो उसकी वायु बाशा वायुमण्डल में फैल जाती है। यह प्रक्रम इतनी शीघ्रता से होता है कि वायु के प्रसार के लि बाहर से ऊष्मा नहीं मिल पाती, अत: यह रुद्धोष्म प्रक्रम है। अत: वायुमण्डलीय दाब के विरुन कार्य करने में निकाय की आन्तरिक ऊर्जा ही व्यय होती है, जिससे टायर से निकलते हुए वाया ठण्डी हो जाती है।


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