BSc 1st Year Zoology Coelenterata Ctenophora Study Notes

BSc 1st Year Zoology Coelenterata Ctenophora Study Notes

 

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Coelenterata Ctenophora Study Notes

Unit III

प्रश्न 16 – ओबीलिया की दंश कोशिका की रचना का वर्णन कीजिए। 

Describe the structure of nemạtocysts of Obelia. 

उत्तर –               ओबीलिया की दंश कोशिकाएँ

                      (Nematocysts of Obelia) 

दंश कोशिका ओबीलिया की अधिचर्म में पायी जाती हैं। ये मुख्य रूप से स्पर्शकों पर अधिक होती हैं और वलयी (annular) बैटरियाँ बनाती हैं। ये दंश कोशिकाएँ पेनिट्रेन्ट प्रकार की होती हैं।

दंश कोशिका एक सैक समान रचना है जो कि अण्डाकार दंशकोरक (cnidoblast) में पायी जाती है। निडोब्लास्ट के आधार पर केन्द्रक होता है।

कैप्सूल समान दंश कोशिका या निमेटोसिस्ट में एक कुण्डलित ट्यूब या धागा होता है। यह दंश कोशिका नहीं होती, अपितु यह कोशिका अंगक है जो एक विशिष्ट कोशिका निडोब्लास्ट में पायी जाती है।

संरचना (Structure)-दंश कोशिका में एक छोटा बल्ब या कैप्सूल होता है जिसकी लम्बाई 5u – 504 तक होती है और इसकी रचना काइटिन के समान पदार्थ से होती है। इसमें एक विषैला द्रव्य अथवा हिप्नोटॉक्सिन (hypnotoxin) भरा होता है। कैप्सूल का बाहरी सिरा एक लम्बे, खोखले तथा वलयाकार फिलामेन्ट या धागे समान ट्यूब में घड़ी के स्प्रिंग समान सैक में अन्तर्वलित रहता है।

BSc Coelenterata Ctenophora Notes
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फिलामेन्ट का आधार फूलकर बट (butt) या शाफ्ट (shaft) बनाता है। बट के अन्दर तीन कंटक (spines) होते हैं जिन्हें बार्बस् (barbs) या स्टाइलेट कहते हैं। बट का बाहरी सिरा एक ढाँपन समान ऑपरकुलम से ढका रहता है। निडोब्लास्ट का बाहरी सिरा एपिडर्मिस से ऊपर एक सूक्ष्म, नुकीले बाल समान प्रवर्ध के रूप में उभरा रहता है, जिसे निडोसिल (cnidocil) कहते हैं। निडोब्लास्ट के अभाव के साइटोप्लाज्म में कुंचनशील पेशीय तन्तुक (fibrils) होते हैं। कुछ निडोब्लास्ट के आधार से एक सूत्र जुड़ा रहता है, जिसे लैसो (lasso) कहते हैं। यह दंश कोशिका को निडोब्लास्ट से बाहर फेंकने से रोकता है।

17 – ओबीलिया के प्लैनुला लारवा का वर्णन कीजिए।

Describe Planula larva of Obelia.

उत्तर –              ओबीलिया का प्लैनुला लारवा

                    (Planula Larva of Obelia)

ठोस गैस्ट्रला लम्बाई में बढ़ता है और एक्टोडर्म कोशिकाएँ पक्ष्माभ (cilia) धारण कर लेती हैं जिससे एक मुक्तप्लावी प्लैनुला लारवा बन जाता है। प्लैनुला का अगला सिरा पिछले सिरे की अपेक्षा चौड़ा होता है। शीघ्र-ही इसकी ठोस एण्डोडर्म में विस्तारक क्रिया (delamination) द्वारा एक गुहिका जिसे आधांत्र (enteron) कहते हैं, बन जाती है।

प्लैनुला अब एक वास्तविक द्विस्तरी लारवा बन जाता है—बाहरी पक्ष्माभित एक्टोडर्म तथा भीतरी एण्डोडर्म। औतिकी रूप से इस लारवा में स्तम्भी एक्टोडर्मी, संवेदी, तन्त्रिका एवं ग्रन्थि कोशिकाएँ, पेशीय प्रवर्ध और दंशन कोशिकाएँ होती हैं।

कुछ समय तक मुक्त प्लावी जीवन के पश्चात् यह लारवा जल में नीचे डूब जाता है और अपने अगले सिरे द्वारा किसी ठोस पदार्थ पर चिपक जाता है। अब इसमें कायान्तरण (metamorphosis) होता है। इसका प्रारम्भिक सिरा चिपकने के लिए आधारी बिम्ब (basal disc) बनाता है और दूरस्थ स्वतन्त्र सिरे पर मुख सहित एक मैनुब्रियम (manubrium) और स्पर्शकों का एक वृत्तक (circlet) उत्पन्न हो जाता है। जब लारवा एक सामान्य पॉलिप के समान दिखायी देने लगता है तब इसे हाइडुला (hydrula) कहते हैं। हाइड्रला अलैंगिक मुकुलन प्रक्रिया द्वारा धीरे-धीरे ओबीलिया निवह में बदल जाता है।

BSc Coelenterata Ctenophora Notes
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प्रश्न 18 – “ओबीलिया के पॉलिप और मेड्यूसा में अन्तर होते हुए भी समानता है।इस कथन की पुष्टि कीजिए

“Obelia’s polyp and medusa even though having differences have similarities. Comment on the statement.

उत्तर-                    पॉलिप और मेड्यूसा में समानता 

            (Similarity between Polyp and Medusa)

एक पॉलिप (जो कि स्थानबद्ध, बेलनाकार एवं लम्बा होता है और जनन ग्रन्थियों के अभाव के कारण मुकुलन द्वारा जनन करता है) और मेड्यूसा (जो कि मुक्त प्लावी छाते के समान होता है और चार जनन-ग्रन्थियों के होने से युग्मकों द्वारा लैंगिक जनन करता है) में अनेक अन्तर होते हुए भी ये दोनों मौलिक रूप से स्पष्ट समान रचनाएँ हैं। पॉलिप और मेड्यसा में निम्नलिखित समानताएँ होती हैं

(1) इनका शरीर अरीय सममित (radially symmetrical) और द्विजननस्तरी (diploblastic) होता है।

(2) मेड्यूसा की बहिःछत्रीय सतह पॉलिप के आधार के समान होती है जो उसे पृथक स्तम्भ से जोड़े रखती है। .

(3) मैनुब्रियम नामक एकसमान प्रवर्ध पर स्थित होने के कारण दोनों में मुख समान । कर

होता है। दोनों में गुदा का अभाव होता है।

(4) मेड्यूसा का आमाशय, अरीय नालें एवं वृत्तीय नाल पॉलिप की जठरवाही गहिका के क्रेया

समान होते हैं जो दोनों में जठरचर्म से आस्तरित रहती है और भोजन को पचाने का कार्य करती है।

(5) दोनों मांसाहारी हैं तथा स्पर्शकों की सहायता से भोजन को पकड़ते और अन्तर्ग्रहण तथा

करते हैं। पाचन क्रिया बहिःकोशिकीय और अन्तःकोशिकीय दोनों प्रकार से होती है और पचा ग्रन्थि हुआ भोजन सारे शरीर में बिना परिसंचरण तन्त्र के ही वितरित हो जाता है।

प्रश्न 19-पॉलिप एवं मेड्यूसा में अन्तर लिखिए। 

Write differences in between polyp and medusa.

उत्तर –

क्रo

संo

पालिप (Polyp) मेड्यूसा (Medusa)
1. स्थानबद्ध (sessile) मुक्तप्वी (Free floating)
2. शरीर नालाकार तथा लम्बा। शरीर तश्तरी अथवा छतरीनुमा।
3. आधार से जुड़ा जिसके कारण मैनुब्रियम ऊपर की ओर। आधार ऊपर की ओर जिसके कारण मैनुब्रियम नीचे की ओर उपस्थित।
4. तन्तुओं की संख्या 24 होती है। तन्तुओं की संख्या युवावस्था में 16 जो वयस्क में बढ़कर असंख्य हो जाती है।
5. मीसोग्लोया अल्पविकसित मीसोग्लोया पूर्ण विकसित
6. बीलम अनुपस्थित बीलम उपस्थित
7. ज्ञानेन्द्रियाँ अनुपस्थित स्टेटोसिस्ट उपस्थित होते है।
8. जनदों (gonads) का अभाव होता है। चार जनद उपस्थित होते है।
9, अलैंगिक जनन पाया जाता है। लैंगिक जनन पाया जाता है।

 

प्रश्न 20 – ऑरीलिया की दंश कोशिकाओं का वर्णन कीजिए।

Describe the nematocysts of Aurelia.

उत्तर-           ऑरीलिया की दंश कोशिकाएँ

                  (Nematocysts of Aurelia)

मुख भुजाओं, बहिः एवं अवछत्रीय सतहों, सीमान्त स्पर्शकों तथा जठर तन्तुओं पर दंश कोशिकाएँ पायी जाती हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं

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  1. अशूक सममूलाभ (Atrichous isorhizas)- इनका सम्पुट (capsule) लम्बा और धागारूपी नली ऊपरी सिरे पर खुली होती है। बट (butt) और शूलों (spines) का अभाव होता है।
  2. होलोट्राइकस सममूलाभ (Holotrichous  isorhizas)-इनका सम्पुट अण्डाकार और बट (butt) सँकरा होता है। धागारूपी नली लम्बी, शीर्ष पर खुली और छोटे-छोटे शूलों की सर्पिल पंक्ति द्वारा आच्छादित रहती है।
  3. विषमशूक सूक्ष्मधारी अधिरम्भ (Hetero- trichous microbasic euryteles) इनका समपुट छोटा होता है। धागारूपी नली ऊपरी सिरे पर खुली और छोटे-छोटे

 

 

 

 


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